अयोध्या। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। यह फैसला ट्रस्ट की अहम बैठक में लिया गया, जो हाल के दान गड़बड़ी विवाद के बाद बुलाई गई थी।
ट्रस्ट ने बताया कि संगठन की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में पहली बार ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो उपयुक्त नामों की सिफारिश करेगी।
ट्रस्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। वे नए स्थायी महासचिव की नियुक्ति तक ट्रस्ट का कामकाज संभालेंगे।
हाल के दिनों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद और बहुमूल्य दान में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इस मामले में जांच जारी है और कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने बैठक के दौरान कहा कि जो कुछ हुआ वह बेहद दुखद है और इसे दोहराने से रोकने के लिए संस्थागत सुधार जरूरी हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है और मंदिर की व्यवस्था को पहले से अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
ट्रस्ट ने यह भी बताया कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विकास कार्य पहले की तरह जारी रहेंगे। श्रद्धालुओं के दर्शन, पूजा व्यवस्था और निर्माण कार्य पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासनिक बदलाव केवल व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नए महासचिव और CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

