नई दिल्ली: देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जून 2026 में भारत की खुदरा महंगाई (CPI) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जा सकती है। इसकी मुख्य वजह खाद्य पदार्थों, सब्जियों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत पर भी पड़ सकता है। यदि कच्चा तेल महंगा होता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे परिवहन लागत में इजाफा होगा और रोजमर्रा की कई वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
हाल के दिनों में सब्जियों, दालों और कुछ अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। यदि महंगाई दर में बढ़ोतरी होती है तो आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
हालांकि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक लगातार महंगाई पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे मानसून और बेहतर कृषि उत्पादन से आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतें भी आगे की स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
अब सभी की नजर जून महीने के आधिकारिक महंगाई आंकड़ों पर है। यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो भविष्य में मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

