नई दिल्ली: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को बड़ा झटका लगा है। जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कोर्ट ने अलका लांबा को दोषी ठहराया है। अब 5 जून को अलका लांबा की सजा पर कोर्ट में बहस होगी।
कांग्रेस नेता अलका लांबा पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा, कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने का आरोप है। अलका लांबा पर बीएनएस की धारा 132, 221, 223 (ए) और 285 के तहत केस चल रहा था, जिसमें कोर्ट ने आज दोषी करार दिया। पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया था। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी की। लांबा संसद का घेराव करने पर आमादा थीं। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं।

