Gwalior. ग्वालियर। शहर के पठान मोहल्ला पुरानी छावनी में बुधवार दोपहर एक गंभीर हादसे में 14 वर्षीय छात्रा रजिया की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, पड़ोसी अपने घर के सामने लगे बिजली के पोल पर लाइट सुधार रहे थे। पोल के तार काटने की वजह से वह पोल टूटकर नीचे गिर गया और रजिया के ऊपर आ गया। घटना के समय रजिया पास ही खड़ी थी। पोल के गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। आनन-फानन में उसके परिवार ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
घटना पठान मोहल्ला, जो ग्वालियर-मुरैना बॉर्डर के पास स्थित है, में हुई। मृतका की पहचान उसके चाचा वसीम खान ने कराई। वसीम ने बताया कि वह घर के बाहर खड़ा था और रजिया भी वहीं पास में थी। इसी दौरान पड़ोसी विशाल खान, सुहाना बेगम और ऋतिक पोल पर लाइट सुधारने आए। विशाल खान ने पोल पर चढ़कर लाइट के तार काटने शुरू किए। वसीम ने कई बार उन्हें चेतावनी दी कि यह तार पोल को बांध रहा है और काटने से पोल गिर सकता है, लेकिन उन्होंने चेतावनी नहीं मानी। जैसे ही उन्होंने तार काटा, पोल टूटकर रजिया पर गिर गया।
घायल छात्रा को अस्पताल ले गए पर नहीं बचा सके जान
रजिया को तुरंत उसके चाचा और अन्य परिजन अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर देख उसे तुरंत जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी पक्ष मौके से फरार हो गया। सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि यह हादसा पड़ोसी की लापरवाही की वजह से हुआ है। पुलिस ने शव को निगरानी में लेकर मर्ग कायम कर दिया है और हादसे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों और परिजनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और परिजनों ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कहा कि अगर पहले चेतावनी मानी जाती तो यह दुखद घटना नहीं होती। हादसे से इलाके में गुस्सा और दुख दोनों का माहौल बना हुआ है। इस हादसे ने एक बार फिर बिजली पोल और अन्य अवसंरचना की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पोलों की नियमित जांच और मरम्मत समय पर नहीं होने से इस प्रकार के हादसे होने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वह अपने आस-पास लगे बिजली पोलों और अन्य खतरनाक संरचनाओं के बारे में प्रशासन को जानकारी दें, ताकि हादसों से बचा जा सके। यह घटना ग्वालियर शहर में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अवसंरचना पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत को भी उजागर करती है।

