Bilaspur. बिलासपुर। जिला परिषद चुनावों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे बिलासपुर जिला से ताल्लुक रखने वाले युवा मोर्चा के दो पदाधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पदमुक्त कर दिया है। भाजपा ने साफ कर दिया है कि संगठन के खिलाफ जाने वालों के लिए संगठन में कोई जगह नहीं होगी। प्रदेश भाजपा नेतृत्व की ओर से जारी इस कार्रवाई में बिलासपुर सदर से जुड़े प्रदेश युवा मोर्चा सचिव रोहित ठाकुर और झंडूता क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले युवा मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष देवांश चंदेल को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। दोनों ही नेता भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को भाजपा की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला बिलासपुर इकाई की
ओर से भेजी गई।
बागियों की सूची पर प्रदेश अध्यक्ष और संगठन स्तर पर मंथन के बाद यह फैसला लिया गया। यहां बता दें कि देवांश चंदेल जांगला वार्ड से जिला परिषद चुनाव मैदान में निर्दलीय उतरे हैं जबकि रोहित ठाकुर बरमाणा वार्ड से निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में पार्टी ने चुनावी रण के बीच संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोनों नेताओं पर कार्रवाई की। भाजपा ने केवल बिलासपुर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे प्रदेश में करीब 28 बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर संगठनात्मक डंडा चलाया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पंचायत और जिला परिषद चुनावों में पार्टी किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग, अंदरूनी बगावत या संगठन विरोधी गतिविधियों को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पंचायत और जिला परिषद चुनावों में बगावत भाजपा के लिए चुनौती बन सकती थी। ऐसे में पार्टी ने समय रहते कार्रवाई कर डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनाई है। भाजपा की इस कार्रवाई को जनता के बीच एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी यह दिखाने की कोशिश में है कि संगठन में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। चुनावी माहौल में यह फैसला भाजपा कैडर को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

