रायपुर में सामने आए बड़े म्यूल अकाउंट घोटाले में गिरफ्तार 475 आरोपियों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है। दो साल से जेल में बंद आरोपियों की जमानत याचिकाएं निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी भी सामने आई है, जिसमें कहा गया कि “हत्यारे को सुधारा जा सकता है, लेकिन साइबर अपराधी को नहीं छोड़ना चाहिए।”
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने अपने बैंक खाते 10 से 25 हजार रुपये में साइबर ठगों को बेच दिए थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया गया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि रायपुर के करीब 3000 बैंक खातों में करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम जमा कराई गई थी।
बताया जा रहा है कि साइबर अपराधियों ने इन खातों के जरिए देशभर में लोगों को ठगी का शिकार बनाया। फर्जी निवेश, ऑनलाइन खरीदारी, लॉटरी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में ठगे गए पैसों को इन्हीं खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में भेजकर निकाल लिया जाता था।
पुलिस कार्रवाई के दौरान अब तक 475 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने मामूली रकम के लालच में अपने बैंक खाते और एटीएम कार्ड साइबर गिरोहों को सौंप दिए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि कुछ बैंक अधिकारियों और मोबाइल सिम सप्लायरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामले में यह भी सामने आया कि कई आरोपियों ने फर्जी सिम कार्ड लेकर बैंक खाते खुलवाए। कुछ मोबाइल दुकानदारों और एजेंटों पर भी साइबर गिरोह की मदद करने का आरोप है। पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज किया है और करोड़ों रुपये की रकम होल्ड पर रखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद मामले को देश के बड़े साइबर अपराध मामलों में गिना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों के कनेक्शन भी खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

