रायपुर की सेजबहार कॉलोनी में हाउसिंग बोर्ड की आवास योजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। रिकॉर्ड में दर्ज 1435 मकानों में से 104 मकानों का जमीन पर कोई निशान नहीं मिला है। मामले में अधिकारियों की मिलीभगत और करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, हाउसिंग बोर्ड की इस कॉलोनी में गरीबों के लिए मकान बनाए जाने थे। दस्तावेजों में मकानों का निर्माण और आवंटन दिखाया गया, लेकिन मौके पर जांच में कई मकान गायब पाए गए। बताया जा रहा है कि कॉलोनी के लेआउट में जिन मकानों का उल्लेख है, वे वास्तविकता में अस्तित्व में ही नहीं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मकानों की नंबरिंग में भी बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। 1288 से 1297, 1298 से 1309, 1310 से 1321, 1322 से 1333 और 1334 से 1345 तक के कई मकानों का रिकॉर्ड तो मौजूद है, लेकिन जमीन पर उनका कोई निर्माण नहीं मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2006-07 में शुरू हुई इस योजना में करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। वर्तमान कीमतों के हिसाब से इन 104 मकानों की लागत करीब 20 से 25 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन मकानों के नाम पर खर्च हुआ पैसा कहां गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान कई नियमों की अनदेखी की गई। कुछ मकानों में अलग-अलग यूनिट के लिए एक ही प्रवेश द्वार बना दिया गया, जिससे योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले के सामने आने के बाद जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।

