रायपुर। गुजरात और तेलंगाना के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विदेशी प्रजाति के कोनोकार्पस (Conocarpus) पौधे के नए रोपण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत आदेश जारी करते हुए पूरे प्रदेश में इस प्रजाति के नए पौधे लगाने पर रोक लगा दी है।
सरकार के अनुसार कोनोकार्पस एक आक्रामक (Invasive) विदेशी प्रजाति है, जो स्थानीय जैव विविधता, भूजल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने इसके नए रोपण पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
सरकार ने अपने आदेश में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोनोकार्पस की जड़ें अत्यधिक गहराई तक फैलती हैं, जिससे भूमिगत जल पाइपलाइन, सीवरेज लाइन और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा यह पौधा स्थानीय पेड़-पौधों की वृद्धि को भी प्रभावित करता है और अधिक मात्रा में भूजल का उपयोग करता है। कुछ अध्ययनों में इसके परागकणों (Pollen) से एलर्जी, अस्थमा और श्वसन संबंधी समस्याओं की आशंका भी जताई गई है।
किन पर लागू होगा आदेश?
सरकार के निर्देश के अनुसार अब राज्य में सरकारी विभाग, नगर निगम, नगर पालिका, पंचायत, सार्वजनिक उपक्रम, निजी संस्थान और आम नागरिक कोई भी नया कोनोकार्पस पौधा नहीं लगा सकेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
पहले से लगे पेड़ों का क्या होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पहले से लगे कोनोकार्पस पेड़ों को एक साथ नहीं हटाया जाएगा। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार चरणबद्ध तरीके से इनके स्थान पर नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, करंज और जामुन जैसे देशी एवं पर्यावरण अनुकूल पौधे लगाए जाएंगे।
इन राज्यों में पहले से लागू है प्रतिबंध
छत्तीसगढ़ से पहले गुजरात और तेलंगाना इस प्रजाति पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य राज्यों ने भी इसके रोपण को हतोत्साहित करने या रोक लगाने के कदम उठाए हैं।

