रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग इन दिनों वरिष्ठ अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि वन मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जबकि भारतीय वन सेवा (IFS) के 14 वरिष्ठ अधिकारी दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर या अपनी पसंद के राज्यों में पदस्थ हैं। इससे विभाग के कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को दैनिक वेतन (डेली वेज) के आधार पर मुख्यालय में जिम्मेदारी देकर काम चलाने की व्यवस्था की है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री एवं मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने अधिकारियों की समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर नाराजगी जताई और खाली पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वन विभाग के कई वरिष्ठ IFS अधिकारी वर्षों से केंद्र सरकार, विभिन्न आयोगों, निगमों, प्राधिकरणों और अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। वहीं कुछ अधिकारी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग का मानना है कि इन अधिकारियों की वापसी से मुख्यालय में प्रशासनिक क्षमता मजबूत होगी और लंबित कार्यों में तेजी आएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, विभाग में 70 वर्ष की आयु पार कर चुके सेवानिवृत्त रेंजर और एसडीओ स्तर के अधिकारियों की भी सेवाएं ली जा रही हैं। उन्हें तकनीकी अनुभव के आधार पर अलग-अलग कार्यों में लगाया गया है, ताकि अनुभवी अधिकारियों की कमी से विभाग का काम प्रभावित न हो।
सरकारी खजाने पर दोहरा बोझ
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रतिनियुक्ति पर गए अधिकारियों का वेतन और अन्य सुविधाओं का खर्च अलग व्यवस्था से चलता है, जबकि सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी मानदेय देकर सेवाएं ली जा रही हैं। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की बात कही जा रही है।
मंथन जारी
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार वन विभाग में अधिकारियों की कमी दूर करने और प्रतिनियुक्त अधिकारियों की वापसी को लेकर उच्च स्तर पर विचार कर रही है। विभागीय स्तर पर भी खाली पदों को भरने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंथन जारी है।

