नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सिल्वर बार समेत कई श्रेणियों की चांदी को ‘फ्री इम्पोर्ट’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब ऐसे उत्पादों के आयात के लिए सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह फैसला देश में बढ़ते चांदी आयात और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लिया है। हाल के महीनों में सोना और चांदी दोनों के आयात में तेज वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे व्यापार घाटा बढ़ने की चिंता सामने आई थी।
तुरंत प्रभाव से लागू हुए नए नियम
डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, नई पाबंदियां तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। अब आयातकों को चांदी के विशेष उत्पादों की खरीद के लिए सरकारी लाइसेंस और अनुमति प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से आयात पर निगरानी मजबूत होगी और नियमों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
हाल ही में बढ़ाई गई थी इम्पोर्ट ड्यूटी
इस फैसले से पहले केंद्र सरकार ने सोना और चांदी पर कस्टम ड्यूटी भी बढ़ाई थी। आयात शुल्क बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रतिबंधों के बाद कीमतों पर और असर पड़ सकता है।
ज्वेलरी और इंडस्ट्री पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी का उपयोग केवल आभूषणों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। ऐसे में आयात पर सख्ती का असर ज्वेलरी कारोबार के साथ-साथ उद्योगों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा।

