जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के कोहकापाल पंचायत में अंधविश्वास से जुड़ा एक मामला सामने आया है। यहां एक 12 वर्षीय किशोर को कथित तौर पर गलत तरीके से रोककर उसके साथ तंत्र-मंत्र संबंधी गतिविधि किए जाने का आरोप है। शुरुआती तौर पर इस घटना को नरबलि की कोशिश से जोड़कर चर्चा की गई, लेकिन पुलिस जांच में अब तक नरबलि देने या उसकी योजना का कोई प्रमाण सामने नहीं आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, मामले के पीछे सोने का हंडा या गड़ा धन मिलने की अंधविश्वासपूर्ण धारणा सामने आई है।
बच्चे को रोककर की गई तंत्र-मंत्र संबंधी गतिविधि
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना नगरनार थाना क्षेत्र के कोहकापाल गांव की है। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने गड़े धन की तलाश के लिए 12 वर्षीय बालक को अपने कब्जे में लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के साथ तंत्र-मंत्र संबंधी गतिविधि की गई थी।
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधी गई थी और कथित तौर पर तंत्र विद्या के जरिए जमीन में छिपे धन का पता लगाने की कोशिश की गई। इसी दौरान बच्चा मौका पाकर वहां से निकलने में सफल रहा और अपने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।
गड़े धन के लालच में रची गई योजना का आरोप
घटना के पीछे गांव में गड़े हुए सोने या धन को हासिल करने की अंधविश्वासपूर्ण धारणा बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि संबंधित लोगों को विश्वास था कि तंत्र-मंत्र के जरिए जमीन में दबे सोने के हंडे का पता लगाया जा सकता है।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अभी तक ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि बच्चे की नरबलि देने की योजना बनाई गई थी या नरबलि देने का प्रयास किया गया था। सोशल मीडिया पर चल रही नरबलि की बातों की भी पुलिस ने पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों ने पुलिस से की शिकायत
घटना की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और भय का माहौल बना। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने पहले गांव में पंचायत बुलाकर मामले को उठाया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ग्रामीणों ने जगदलपुर पहुंचकर सीएसपी से मामले की शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान बच्चे, संबंधित व्यक्तियों और संभावित गवाहों से पूछताछ की गई।
BNS की धाराओं में अपराध दर्ज
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगरनार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, धारा 127(2), 137(2), 351(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है। इन धाराओं में गलत तरीके से रोकना/बंधक बनाना, अपहरण, आपराधिक धमकी और साझा मंशा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में तीन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज होने की बात कही गई है। हरिभूमि की रिपोर्ट में दो युवकों और एक बाबा की भूमिका का उल्लेख है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में पुलिस जांच के हवाले से दो मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिए जाने और पूजा-पाठ करने वाले व्यक्ति की भूमिका भी जांच में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
नरबलि की बात पर पुलिस ने क्या कहा?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात पुलिस का स्पष्टीकरण है। घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे “नरबलि की कोशिश” के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन पुलिस जांच में अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस के अनुसार, किशोर के साथ तंत्र-मंत्र से संबंधित गतिविधि और उसे गलत तरीके से रोककर रखने की बात सामने आई है, लेकिन नरबलि देने का प्रयास या उसकी कोई योजना जांच में प्रमाणित नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल मामले को नरबलि की पुष्टि हुई घटना के तौर पर प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
पुलिस जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही
पुलिस ने मामले में संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बच्चे को किस उद्देश्य से रोका गया था, तंत्र-मंत्र की गतिविधि में कौन-कौन लोग शामिल थे और गड़े धन से जुड़ी इस अंधविश्वासपूर्ण धारणा के पीछे किसकी भूमिका थी।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता जरूरी
कोहकापाल की घटना एक बार फिर दिखाती है कि गड़े धन, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़ी धारणाएं किस तरह गंभीर परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं। खास तौर पर किसी नाबालिग को ऐसी गतिविधि में शामिल करना बेहद गंभीर मामला है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए नरबलि की कोशिश को लेकर सामने आई बातों को पुलिस की पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

