रायपुर। राजधानी रायपुर में कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोबारा गिरफ्तारी की अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने रायपुर में उसके घर और कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन शोएब पुलिस के हाथ नहीं लगा।
विदेशी नंबर से आया था धमकी भरा कॉल
मामला सितंबर 2026 में सामने आया था। पुलिस के अनुसार कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को विदेशी नंबर के जरिए धमकी दी गई और कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। रकम नहीं देने पर कुकरेजा और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दिए जाने का आरोप है। धमकी देने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग से जुड़ा बताया था।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल और सिम से जुड़े सुरागों के आधार पर कई लोगों से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक एक युवक से पूछताछ के बाद शोएब ढेबर का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी।
पहले गिरफ्तारी, फिर मिली जमानत
मामले में शोएब ढेबर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था। इसके बाद रिमांड कोर्ट से उसे जमानत मिल गई। पुलिस ने मामले की जांच और पूछताछ के लिए उसकी दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मांगी।
सीजेएम कोर्ट ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए शोएब की पुनः गिरफ्तारी की अनुमति दे दी। इसके बाद पुलिस टीमों ने उसकी तलाश शुरू की।
पुलिस पहुंचने से पहले ही निकल गया शोएब
पुलिस की कार्रवाई के दौरान शोएब के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं मिला। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने बैरन बाजार स्थित पारिवारिक आवास, पाम बेलाजिओ स्थित ठिकाने और रिश्तेदारों के संभावित ठिकानों समेत कई जगहों पर छापेमारी की। इसके बावजूद उसका पता नहीं चल सका।
पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें बनाई हैं। इनमें कुछ टीमें रायपुर में संभावित ठिकानों की जांच कर रही हैं, जबकि अन्य टीमों को शहर से बाहर उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों पर नजर रखने के लिए लगाया गया है।
छापे की सूचना पहले कैसे पहुंची? पुलिसकर्मी लाइन अटैच
इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण जांच शुरू हुई है। पुलिस को आशंका है कि कार्रवाई की जानकारी शोएब तक पहले ही पहुंच गई थी, जिसके कारण वह पुलिस के पहुंचने से पहले ठिकाने से निकल गया।
इसके बाद रायपुर पुलिस ने एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट में पदस्थ आरक्षक शिवम द्विवेदी को लाइन अटैच कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक जांच इस बात पर केंद्रित है कि पुलिस की दबिश से जुड़ी गोपनीय जानकारी आरोपी तक कैसे पहुंची और इसमें किसी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। हालांकि आरक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों के विस्तृत तथ्य अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
कुछ रिपोर्टों में दो आरक्षकों को लाइन अटैच किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
पूर्व महापौर एजाज ढेबर से 50 करोड़ की धमकी का कनेक्शन भी जांच में
इस केस की जांच के दौरान एक अन्य रंगदारी मामले का भी उल्लेख सामने आया है। पूर्व रायपुर महापौर एजाज ढेबर और उनके परिवार को भी कथित तौर पर विदेशी नंबरों से धमकी देकर 50 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। उस मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग का नाम इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।
पुलिस दोनों मामलों के बीच किसी संभावित कड़ी की जांच कर रही है। हालांकि दोनों मामलों के बीच सीधा संबंध अभी जांच का विषय है, इसलिए इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
अब पुलिस की नजर इन बिंदुओं पर
शोएब की तलाश के साथ पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि:
- 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने की पूरी योजना किसने बनाई?
- धमकी देने के लिए विदेशी नंबर, मोबाइल और सिम की व्यवस्था किसने की?
- लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग के नाम का इस्तेमाल क्यों किया गया?
- इस मामले में शोएब के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं?
- पुलिस की दबिश की सूचना आरोपी तक कैसे पहुंची?
- क्या 25 करोड़ रुपये वाले मामले और पूर्व महापौर से कथित 50 करोड़ रुपये की मांग के बीच कोई कनेक्शन है?
फिलहाल शोएब ढेबर पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में छापेमारी जारी है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों से तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नोट: ऊपर दी गई जानकारी 1-2 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित/अपडेट हुई मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। रंगदारी और धमकी से जुड़े आरोप अभी जांच के अधीन हैं; अंतिम तथ्य पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे।

