छत्तीसगढ़। बिलासपुर में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक कर्मचारी ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर करीब सात साल तक नौकरी की। मामला सामने आने के बाद अब विभाग की ओर से कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन एवं अन्य भुगतान की रिकवरी का रास्ता साफ हो रहा है।
जानकारी के अनुसार संबंधित कर्मचारी ने नौकरी हासिल करने के लिए जिस शैक्षणिक दस्तावेज का इस्तेमाल किया था, उसकी जांच में गड़बड़ी सामने आई। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान मार्कशीट के फर्जी होने का खुलासा हुआ।
इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच की गई। जांच में यदि नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो ऐसी नियुक्ति को नियमों के विपरीत माना जाता है। इसी आधार पर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर कर्मचारी ने करीब सात वर्षों तक सरकारी सेवा में रहते हुए वेतन और अन्य वित्तीय लाभ कैसे प्राप्त किए। अब विभाग की ओर से इन भुगतानों की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
मामले में केवल नौकरी समाप्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहने वाली है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्राप्त किए गए आर्थिक लाभ की भी गणना की जाएगी और नियमानुसार संबंधित राशि की रिकवरी की जा सकती है।
यह मामला सरकारी नियुक्तियों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े करता है। यदि नियुक्ति के समय ही दस्तावेजों का उचित सत्यापन हो जाता तो कर्मचारी लंबे समय तक सेवा में नहीं रह पाता।
अब संबंधित विभाग दस्तावेजों और सेवा अवधि से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिकवरी और अन्य विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

