राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां एक युवक की मौत को पहले सड़क हादसा बताया जा रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में पूरी कहानी ही बदल गई। पुलिस के मुताबिक युवक की मौत दुर्घटना में नहीं, बल्कि हत्या के कारण हुई थी। इस मामले में मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि दोनों ने मिलकर युवक के सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या की और बाद में वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की।
मामला राजनांदगांव जिले के चिचोला चौकी क्षेत्र के ग्राम महाराजपुर का है। यहां नेशनल हाईवे-53 के किनारे एक गड्ढे में युवक घायल अवस्था में मिला था। उसके चेहरे और सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। शुरुआत में मामला सड़क दुर्घटना जैसा नजर आया, लेकिन घटनास्थल से मिले कुछ साक्ष्यों ने पुलिस को संदेह में डाल दिया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को हत्या की साजिश के संकेत मिले।
10 अगस्त को गड्ढे में मिला था युवक
पुलिस के अनुसार घटना 10 अगस्त 2026 की है। मृतक की पहचान ग्राम रामपुर निवासी प्रेमलाल साहू के रूप में हुई है। मृतक के भाई ओमप्रकाश साहू ने चिचोला पुलिस चौकी में सूचना दी थी कि उसका भाई शाम करीब 7 बजे से रात 9 बजे के बीच ग्राम महाराजपुर स्थित भारत पेट्रोल पंप के पास एनएच-53 के किनारे एक गड्ढे में घायल अवस्था में पड़ा मिला है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। युवक के मुंह, नाक और माथे पर चोट के निशान थे। शरीर से खून बह रहा था। घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस को मृतक के दाहिने हाथ की उंगली के पास एक बड़ा मुरूम का पत्थर भी मिला। इस पत्थर पर खून के निशान पाए गए।
यही साक्ष्य पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ और घटना को लेकर संदेह गहराने लगा। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
सड़क हादसा या सोची-समझी हत्या?
घटना की परिस्थितियां सामान्य सड़क हादसे से अलग नजर आने के बाद पुलिस ने कई पहलुओं पर जांच शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मामले को गंभीरता से लिया।
राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और पुलिस अनुविभागीय अधिकारी केसरीनंदन नायक के मार्गदर्शन में चिचोला चौकी प्रभारी निरीक्षक योगेश पटेल, सहायक उपनिरीक्षक वीरेंद्र नाविक और पुलिस टीम ने घटनास्थल के अलावा मृतक के परिवार और परिचितों से पूछताछ की।
पुलिस ने घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया। मृतक और संदिग्ध लोगों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा लोकेशन की जांच की गई।
इसी दौरान पुलिस को दो लोगों की भूमिका संदिग्ध लगी।
पत्नी और कथित प्रेमी से पूछताछ
जांच के दौरान पुलिस ने नरबद साहू, उम्र 40 वर्ष, निवासी ग्राम पटपर और मृतक की पत्नी गंगोत्री साहू, उम्र 27 वर्ष, निवासी ग्राम रामपुर को संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए लिया।
पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, गवाहों से मिली जानकारी और तकनीकी जांच को एक साथ जोड़ने के बाद दोनों की भूमिका सामने आने लगी।
पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों से घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। पुलिस का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों की संलिप्तता सामने आई और इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के सामने हत्या की बात कबूली
पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों आरोपियों ने प्रेमलाल साहू की हत्या करने की बात स्वीकार की। आरोप है कि मृतक के सिर पर पत्थर से वार किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद हत्या को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक और उसकी पत्नी के बीच घरेलू विवाद चल रहा था। पुलिस के अनुसार मृतक द्वारा पत्नी के साथ विवाद करने, गाली-गलौज करने और उसे घर से निकल जाने की धमकी देने की बात भी जांच में सामने आई है।
इसके अलावा पुलिस ने मृतक की पत्नी और नरबद साहू के बीच कथित संबंध को भी हत्या के पीछे की वजहों में शामिल बताया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।
हत्या के बाद हादसे का रूप देने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने हत्या के बाद घटनास्थल और शव की स्थिति ऐसी बनाने की कोशिश की, जिससे पहली नजर में मामला सड़क दुर्घटना जैसा लगे।
मृतक का शव एनएच-53 के किनारे गड्ढे में मिला था। शरीर पर चोट के निशान और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखकर शुरुआत में दुर्घटना की आशंका हो सकती थी। लेकिन खून से सना पत्थर मिलने और अन्य साक्ष्यों के बाद पुलिस ने मामले को दूसरे नजरिए से देखना शुरू किया।
तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के बाद पुलिस ने कथित हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने का दावा किया।
मोबाइल लोकेशन ने खोला राज
इस मामले की जांच में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने संदिग्धों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की। इसके अलावा घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों से मिली जानकारी का मिलान किया गया।
पुलिस के मुताबिक इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर नरबद साहू और गंगोत्री साहू से पूछताछ की गई और उनकी कथित भूमिका सामने आई।
अपराध की जांच में तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल अब पुलिस के लिए अहम हथियार बनता जा रहा है। मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड जैसे डिजिटल साक्ष्य घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों के साथ मिलकर जांच की दिशा तय करने में मदद करते हैं।
दोनों आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय से दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और आरोपियों के कथित बयानों के आधार पर आगे की विवेचना की जाएगी।
पुलिस की जांच से बदली पूरी कहानी
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआत में घटना सड़क हादसे जैसी दिखाई दे रही थी। युवक का शव हाईवे के किनारे गड्ढे में मिला था और उसके शरीर पर चोटें थीं। लेकिन घटनास्थल से मिले खून लगे पत्थर और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पुलिस को जांच का रास्ता बदलने पर मजबूर किया।
इसके बाद पुलिस ने केवल दुर्घटना मानकर जांच आगे बढ़ाने के बजाय हत्या की आशंका को भी शामिल किया। परिवार और परिचितों से पूछताछ के साथ मोबाइल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच की गई। अंततः पुलिस ने मृतक की पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा करने का दावा किया।
अब आगे क्या होगा?
दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे जाने के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। पुलिस की ओर से जुटाए गए भौतिक और डिजिटल साक्ष्य अदालत में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल पुलिस ने मामले को हत्या का प्रकरण मानते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। घटना के पीछे घरेलू विवाद और मृतक की पत्नी के कथित संबंधों को प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि इन आरोपों और हत्या की पूरी परिस्थितियों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
राजनांदगांव के इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि किसी संदिग्ध मौत को केवल शुरुआती परिस्थितियों के आधार पर दुर्घटना मान लेना उचित नहीं होता। घटनास्थल से मिले छोटे-छोटे साक्ष्य और तकनीकी जांच कई बार पूरे मामले की दिशा बदल सकते हैं। इस मामले में भी पुलिस ने शुरुआत में दुर्घटना जैसे दिख रहे घटनाक्रम की गहराई से जांच की और हत्या की साजिश का खुलासा करने का दावा किया है।

