नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद अब एक बार फिर संसद की बैठक बुलाए जाने की संभावना ने दिल्ली की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के हालिया बयान ने इस संभावना को और हवा दे दी है। रिजिजू ने संकेत दिया है कि मानसून सत्र का अभी औपचारिक रूप से सत्रावसान नहीं हुआ है, ऐसे में जरूरत पड़ने पर संसद को दोबारा बुलाया जा सकता है।
रिजिजू के बयान से बढ़ा सस्पेंस
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से जब संसद की एक और बैठक या विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र अभी औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है और ऐसे उदाहरण पहले भी रहे हैं, जब सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद उसी सत्र में दोबारा बुलाया गया।
रिजिजू के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार किसी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए संसद की बैठक फिर बुलाने की तैयारी कर रही है।
परिसीमन विधेयक पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में परिसीमन का मुद्दा माना जा रहा है। सरकार की ओर से लोकसभा सीटों के पुनर्गठन और महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े विषयों पर पहले भी चर्चा होती रही है।
21 अगस्त की रिपोर्टों में भी यह सामने आया था कि सरकार के पास संसद का विशेष सत्र बुलाने या मौजूदा मानसून सत्र को ही दोबारा संचालित करने का विकल्प खुला है। संभावित एजेंडे में परिसीमन विधेयक और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों को प्रमुखता मिलने की चर्चा थी।
महिला आरक्षण कानून भी अहम मुद्दा
सरकार के लिए महिला आरक्षण कानून को लागू करना भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा है। रिजिजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं से किए गए वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
महिला आरक्षण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का संबंध लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर होने वाली किसी भी संसदीय पहल का राजनीतिक असर काफी व्यापक हो सकता है।
विपक्ष ने मांगी सर्वदलीय बैठक
सरकार की ओर से संसद दोबारा बुलाने की संभावना के संकेतों के बीच विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने विपक्षी दलों को प्रस्ताव का अध्ययन करने और विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव को जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा जरूरी है।
मानसून सत्र के बाद से ही जारी है अटकलें
लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। हालांकि, इसके बाद संसद के सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं होने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। कांग्रेस ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार संसद को दोबारा बुलाने का विकल्प खुला रखना चाहती है।
सामान्य तौर पर किसी सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की औपचारिक अधिसूचना जारी होती है। मौजूदा स्थिति में यही तकनीकी पहलू संसद की संभावित वापसी को लेकर अटकलों का बड़ा आधार बना हुआ है।
क्या सितंबर में हो सकता है विशेष सत्र?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सरकार सितंबर के तीसरे सप्ताह में संसद का छोटा विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसमें महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना बताई गई है। हालांकि, अंतिम फैसला और सत्र की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि संसद निश्चित रूप से सितंबर में दोबारा बैठेगी। लेकिन सरकार के शीर्ष स्तर से आए संकेतों ने इस संभावना को राजनीतिक बहस के केंद्र में जरूर ला दिया है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार संसद को दोबारा बुलाने का फैसला करती है तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि कौन-कौन से विधेयक एजेंडे में शामिल किए जाएंगे और सरकार को उन्हें पारित कराने के लिए कितना राजनीतिक समर्थन हासिल है।
दूसरी ओर विपक्ष ने पहले ही परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक चर्चा और सर्वदलीय बैठक की मांग कर दी है। ऐसे में अगर संसद की बैठक दोबारा बुलाई जाती है तो यह सिर्फ विधायी कार्रवाई नहीं, बल्कि आगामी चुनावी राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन सकता है।
फिलहाल संसद को दोबारा बुलाने की कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन किरेन रिजिजू के बयान, मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान न होना और परिसीमन-व महिला आरक्षण को लेकर चल रही चर्चाओं ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जरूर जन्म दे दिया है।

