रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में कथित प्रश्नपत्र लीक का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को लेकर अब एक और पेपर के लीक होने का आरोप सामने आया है। इसे मौजूदा विवाद में तीसरा कथित पेपर लीक मामला बताया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने IGKV पेपर लीक मामले में जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए थे।
एक के बाद एक सामने आ रहे पेपर लीक के मामले
IGKV से जुड़े पेपर लीक विवाद की शुरुआत BSc Agriculture की परीक्षा से जुड़े मामले से हुई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय को एक अन्य परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर शिकायत मिली। 21 अगस्त को BSc Agriculture सेकेंड ईयर की Agricultural Entomology परीक्षा को कथित पेपर लीक की शिकायत के बाद रद्द करना पड़ा था।
यह परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होनी थी, लेकिन परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले डीन कार्यालय को प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत वाला ई-मेल मिला। बाद में कुछ WhatsApp ग्रुप में एक प्रश्नपत्र वायरल होने की जानकारी सामने आई। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक वायरल पेपर के करीब 70 प्रतिशत प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते पाए गए थे। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा सितंबर के पहले सप्ताह में कराने का फैसला लिया गया।
अब तीसरे पेपर को लेकर मचा हड़कंप
ताजा विवाद में BSc Genetics परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र के कथित लीक होने की बात सामने आई है। लगातार तीसरी बार प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर सवाल उठने से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
इस घटनाक्रम ने छात्रों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बार-बार परीक्षा रद्द होने या प्रश्नपत्र बदलने की स्थिति परेशानी का कारण बन सकती है। साथ ही इससे विद्यार्थियों के बीच परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि किसी भी प्रश्नपत्र के वास्तविक रूप से लीक होने की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी। इसलिए फिलहाल सामने आए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पहले मामले में पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई
IGKV के पहले पेपर लीक मामले की जांच में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया था। रिपोर्टों के मुताबिक कथित तौर पर प्रश्नपत्र को बिना सीलबंद लिफाफा पूरी तरह खोले कैमरे के जरिए कॉपी किया गया था। पुलिस जांच में एंडोस्कोपिक कैमरा इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार, प्रश्नपत्र वाले सीलबंद लिफाफे में बेहद छोटा चीरा लगाकर उसमें एक छोटा कैमरा डाला गया और प्रश्नपत्र की तस्वीरें ली गईं। इसके बाद लिफाफे को इस तरह रखा गया कि वह बाहर से सामान्य और सीलबंद दिखाई दे।
इस मामले में दुर्ग जिले के एक निजी कॉलेज से जुड़े एक प्रोफेसर और पांच विद्यार्थियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र तक पहुंच कैसे बनाई गई और इस पूरी कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
70 फीसदी सवाल मिलने के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
21 अगस्त के मामले में वायरल हुए प्रश्नपत्र की जांच के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारी ने बताया था कि वायरल पेपर पूरी तरह वास्तविक प्रश्नपत्र जैसा नहीं था, लेकिन करीब 70 प्रतिशत प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते थे। इसी वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति भी गठित की थी। 33 संबद्ध कॉलेजों को परीक्षा रद्द किए जाने और संशोधित परीक्षा कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी गई थी। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने और अपने कॉलेज या डीन कार्यालय के संपर्क में रहने की सलाह दी गई थी।
CM साय का सख्त रुख
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सरकार इस तरह की अनियमितता को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के इस रुख के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच एजेंसियों पर यह जिम्मेदारी है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में सेंध कैसे लगी, इसकी पूरी जानकारी सामने लाई जाए। साथ ही यह भी पता लगाना जरूरी है कि कथित तौर पर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचा।
छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर
पेपर लीक का सबसे बड़ा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ता है जो महीनों तक मेहनत कर परीक्षा की तैयारी करते हैं। अगर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर पहुंच जाता है तो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ सीधा अन्याय होता है।
इसके अलावा परीक्षा रद्द होने के कारण विद्यार्थियों का शैक्षणिक कैलेंडर भी प्रभावित हो सकता है। नई तारीख पर परीक्षा आयोजित होने से अन्य परीक्षाओं, प्रवेश प्रक्रियाओं और आगे की पढ़ाई की योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
यही कारण है कि ऐसे मामलों में केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं माना जाता। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई, पैकिंग, भंडारण, परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने भी सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि यह केवल परीक्षा व्यवस्था की खामी नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। विपक्ष ने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
अब तीसरे कथित पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। छात्रों और अभिभावकों की नजर जांच के अगले कदम पर है।
जांच से सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या है। क्या प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कहीं बड़ी चूक हुई, या किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका रही? क्या एक ही गिरोह या नेटवर्क इन घटनाओं के पीछे है? और क्या विश्वविद्यालय की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल सरकार के सख्त रुख और पुलिस जांच के बीच उम्मीद है कि पूरे मामले की तह तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी।

