रायपुर। राजधानी रायपुर से रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक पिता पर अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ करीब तीन साल तक दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। आरोप है कि पीड़िता महज 13 साल की उम्र में पहली बार गर्भवती हुई थी। इसके बाद आरोपी पिता ने अपनी बहन की मदद से उसे गर्भपात की दवा खिलाई और गर्भपात कराया। मामला यहीं नहीं रुका। दूसरी बार गर्भवती होने पर पीड़िता की उम्र बढ़ाकर दस्तावेजों में उसे बालिग दिखाने और निजी अस्पताल में प्रसव कराने का आरोप भी सामने आया है।
सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि प्रसव के बाद पैदा हुए नवजात को कथित तौर पर करीब 6 लाख रुपये में एक दंपती को सौंप दिया गया। पुलिस ने शिकायत सामने आने के बाद पीड़िता के पिता और बुआ समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
13 साल की उम्र में पहली बार हुई गर्भवती
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने अपने बयान में बताया है कि वर्ष 2023 में उसके माता-पिता अलग हो गए थे। इसके बाद वह अपनी दो छोटी बहनों के साथ पिता के पास रहने लगी। परिवार की परिस्थितियों के कारण उस पर छोटी बहनों की जिम्मेदारी भी आ गई थी।
आरोप है कि इसी दौरान पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो उसे कथित तौर पर मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। डर के कारण वह लंबे समय तक किसी को अपनी आपबीती नहीं बता सकी।
पहली बार जब पीड़िता 13 वर्ष की उम्र में गर्भवती हुई, तब आरोपी ने अपनी बहन की मदद ली। आरोप है कि उसे गर्भपात की दवा खिलाकर गर्भपात कराया गया।
दूसरी बार गर्भवती हुई तो उम्र बढ़ाकर दिखाने का आरोप
मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, वर्ष 2024 में पीड़िता दोबारा गर्भवती हुई। इस बार उसने अपनी बुआ को इसकी जानकारी दी। बुआ ने कथित तौर पर आरोपी पिता को इसकी जानकारी दी।
आरोप है कि इसके बाद पीड़िता को गर्भपात की दवा दी गई। दवा खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और गर्भपात हो गया। कुछ समय बाद आरोपी पिता द्वारा उसका कथित रूप से फिर शारीरिक शोषण किए जाने का आरोप है।
इसके बाद जब पीड़िता दोबारा गर्भवती हुई तो उसकी उम्र छिपाने के लिए दस्तावेजों में उम्र बढ़ाकर उसे 26 साल का दिखाया गया। आरोप है कि फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उसे शादीशुदा महिला के रूप में पेश किया गया और निजी अस्पताल में उसका प्रसव कराया गया।
नवजात को 6 लाख रुपये में सौंपने का आरोप
प्रसव के बाद नवजात को कथित तौर पर एक दंपती को सौंप दिया गया। इसके लिए करीब 6 लाख रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को किस प्रक्रिया के तहत और किन परिस्थितियों में दूसरे दंपती को दिया गया।
जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और नवजात को दूसरे दंपती को सौंपने में शामिल लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।
मां से अलग होने के बाद खुली पूरी कहानी
करीब सात महीने बाद पीड़िता ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मां से संपर्क किया और उसे पूरी आपबीती बताई। इसके बाद मां और मामा पीड़िता को लेकर पुलिस के पास पहुंचे।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में पीड़िता का 38 वर्षीय पिता और 34 वर्षीय बुआ भी शामिल हैं। इसके अलावा निजी अस्पताल से जुड़े लोगों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में है।
मामले में एक निजी अस्पताल के सुपरवाइजर, एंबुलेंस चालक और अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस फर्जी आधार कार्ड तैयार करने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।
आरोपियों की भूमिका की जांच
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में केवल दुष्कर्म ही नहीं, बल्कि नाबालिग की गर्भावस्था छिपाने, गर्भपात कराने, उम्र से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर और नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने यह भी जांच शुरू की है कि निजी अस्पताल में पीड़िता का प्रसव किस दस्तावेज के आधार पर कराया गया और अस्पताल के कर्मचारियों ने उसकी उम्र एवं पहचान से जुड़े दस्तावेजों की किस तरह जांच की थी।
मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी और नवजात को दूसरे दंपती तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
सोशल मीडिया के जरिए मां तक पहुंची पीड़िता
इस मामले का खुलासा इसलिए हो सका क्योंकि पीड़िता ने लंबे समय तक चुप रहने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मां से संपर्क किया। मां को पूरी जानकारी देने के बाद उसने पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत जुटाई।
पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और मामले से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब पीड़िता के बयान, दस्तावेजों, अस्पताल के रिकॉर्ड और कथित आर्थिक लेन-देन समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
यह मामला सामने आने के बाद राजधानी में नाबालिगों की सुरक्षा और परिवार के भीतर होने वाले यौन अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान और उससे जुड़ी ऐसी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सकती है।

