रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उपभोक्ताओं द्वारा बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार और बिजली वितरण कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने प्रदेशभर में प्रदर्शन कर स्मार्ट मीटर योजना को वापस लेने और उपभोक्ताओं के बढ़े हुए बिजली बिलों की जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम लोगों के बिजली बिल पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है और स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूली जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। कई जगह नारेबाजी की गई और सरकार के खिलाफ विरोध जताया गया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने जनता की शिकायतों का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने कांग्रेस और उपभोक्ताओं के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाते और न ही गलत रीडिंग दर्ज करते हैं। कंपनी ने तीन महीने के अध्ययन का हवाला देते हुए दावा किया कि रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में जुलाई के दौरान बिजली खपत में 28 से 53 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। कंपनी के अनुसार गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण अप्रैल, मई और जून में बिजली की खपत बढ़ी थी, जिससे बिल अधिक आए।
बिजली कंपनी का यह भी कहना है कि उपभोक्ताओं की शंकाओं को दूर करने के लिए हजारों स्थानों पर स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर लगाए गए हैं और दोनों की रीडिंग में कोई अंतर नहीं पाया गया। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और ‘मोर बिजली’ ऐप या स्मार्ट मीटर पोर्टल के माध्यम से अपनी दैनिक बिजली खपत की निगरानी करें।
स्मार्ट मीटर का मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर विपक्ष इसे जनता पर आर्थिक बोझ बता रहा है, वहीं सरकार और बिजली कंपनी इसे बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और जनचर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

