छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान, गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र का गायन अब अनिवार्य
रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब से, प्रत्येक स्कूल दिवस की शुरुआत राष्ट्रगान से होगी, और मध्याह्न भोजन से पहले गायत्री मंत्र तथा भोजन के बाद भोजन मंत्र का गायन अनिवार्य होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय भावना, आध्यात्मिक चेतना और कृतज्ञता की भावना को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
यह निर्णय शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से स्कूलों में छात्रों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक मूल्यों का समावेश भी शामिल है। इस संदर्भ में, राष्ट्रगान राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक है, गायत्री मंत्र ज्ञान और आत्म-शुद्धि का स्रोत माना जाता है, और भोजन मंत्र भोजन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा को दर्शाता है।
विस्तृत जानकारी
शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में दिन की शुरुआत प्रार्थना सभा के साथ होगी, जिसमें सबसे पहले राष्ट्रगान का गायन किया जाएगा। इसके बाद, मध्याह्न भोजन के समय, सभी छात्रों और शिक्षकों को मिलकर गायत्री मंत्र का जाप करना होगा। भोजन समाप्त होने के उपरांत, भोजन के लिए प्राप्त संसाधनों के प्रति आभार व्यक्त करने हेतु भोजन मंत्र का पाठ किया जाएगा। इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और स्कूलों से नियमित रिपोर्ट मांगी जाएगी।
मुख्य बिंदु
- सभी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य।
- मध्याह्न भोजन से पहले गायत्री मंत्र का जाप।
- भोजन के बाद भोजन मंत्र का पाठ।
- छात्रों में राष्ट्रीयता, आध्यात्मिकता और कृतज्ञता की भावना का विकास।
प्रभाव और आगे की स्थिति
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से छात्रों में अनुशासन, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ेगा। यह न केवल उनके व्यक्तिगत विकास में सहायक होगा, बल्कि समाज में सकारात्मकता फैलाने में भी योगदान देगा। हालांकि, कुछ वर्गों द्वारा इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि यह निर्णय छात्रों के समग्र विकास के लिए एक सकारात्मक कदम है। शिक्षा विभाग इस पहल के कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी करेगा और आवश्यकतानुसार आगे के कदम उठाएगा।
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