बकरीद (Photo Credits: IANS)
नई दिल्ली, 23 मई: आगामी त्योहार बकरीद (Bakrid) (ईद-उल-अजहा) को लेकर देश के प्रतिष्ठित मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) ने शनिवार को एक विस्तृत दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किया है. संगठन ने देश भर के मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे अपनी धार्मिक परंपरा ‘कुर्बानी’ को पूरी श्रद्धा के साथ निभाएं, लेकिन इस दौरान सरकारी नियमों, स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों और नागरिक मानदंडों का सख्ती से पालन करें. जमीयत ने विशेष रूप से सार्वजनिक स्वच्छता, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और कानूनी सीमाओं के भीतर ही सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने पर जोर दिया है. यह भी पढ़ें: Bakrid Ka Chand Kab Dikhega 2026: सऊदी अरब, यूएई और भारत में कब दिखेगा चांद और कब होगी ईद-उल-अजहा?
कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से बचने की सख्त हिदायत
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘कुर्बानी एक अत्यंत महत्वपूर्ण इस्लामी इबादत है, जो हर साहिब-ए-हैसियत (आर्थिक रूप से सक्षम) मुसलमान पर फर्ज है. कुर्बानी के इन विशेष दिनों में इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए सक्षम नागरिक अपनी जिम्मेदारी पूरी करें.’
इसके साथ ही उन्होंने देश के कानून के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए स्पष्ट रूप से कहा, ‘मुस्लिम समुदाय को उन जानवरों की कुर्बानी देने से पूरी तरह बचना चाहिए, जिन पर स्थानीय या राज्य के कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। कानून का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.’
सड़कों पर न फेंकें अवशेष, सोशल मीडिया पर न डालें वीडियो
त्योहार के दौरान सार्वजनिक स्वच्छता (Hygiene and Sanitation) और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मौलाना मदनी ने गाइडलाइन में कई व्यावहारिक बातें शामिल की हैं:
- कचरा प्रबंधन: पशुओं के अवशेषों या अपशिष्ट पदार्थों को सड़कों, गलियों या सार्वजनिक नालियों में बिल्कुल न फेंका जाए। इसके बजाय, अवशेषों को प्लास्टिक बैग में सुरक्षित रूप से बंद करके स्थानीय नगर निकाय द्वारा निर्धारित किए गए डंपिंग या कचरा स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। सफ़ाई कर्मियों के साथ पूरा सहयोग किया जाए.
- सोशल मीडिया पर प्रतिबंध: जमीयत प्रमुख ने युवाओं और आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे कुर्बानी की तस्वीरें, खून के दृश्य या वीडियो सोशल मीडिया (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब या वॉट्सऐप) पर साझा करने से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि इससे अन्य समुदायों की भावनाएं आहत हो सकती हैं.
- दूसरों की असुविधा का ध्यान: ऐसी कोई भी गतिविधि न की जाए जिससे पड़ोसियों, राहगीरों या अन्य धर्म के लोगों को किसी भी तरह की असुविधा, परेशानी या दुर्गंध का सामना करना पड़े.
उकसावे या तनाव की स्थिति में खुद कानून हाथ में न लें
त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक तनाव, अफवाहों या असामाजिक तत्वों द्वारा किए जाने वाले उकसावे की आशंकाओं को लेकर जमीयत ने समुदाय को धैर्य रखने की सलाह दी है. गाइडलाइन में कहा गया है कि यदि किसी स्थानीय क्षेत्र में सांप्रदायिक तत्वों द्वारा कोई उकसावा, धमकी या उत्पीड़न की स्थिति पैदा की जाती है, तो भावुक होकर प्रतिक्रिया देने के बजाय पूर्ण संयम, समझदारी और शांति का परिचय दें.
ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत संबंधित पुलिस स्टेशन या जिला प्रशासन के पास जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज करानी चाहिए. किसी भी परिस्थिति में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है.
मौलाना मदनी ने अंत में कहा कि यदि किसी विशिष्ट स्थान पर कुर्बानी की रस्म को पूरा करने में कोई प्रशासनिक बाधा या अवांछित अड़चन सामने आती है, तो स्थानीय लोग तुरंत जमीयत उलेमा-ए-हिंद के केंद्रीय कार्यालय या इसकी निकटतम स्थानीय इकाइयों से संपर्क करके कानूनी सहायता और उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं.

