रायपुर में आईडीबीआई बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि 22 लोगों से करीब 1.53 करोड़ रुपये की ठगी की गई। जांच में खुलासा हुआ है कि निवेशकों को जो एफडी रसीदें दी गई थीं, वे असली नहीं बल्कि फर्जी थीं और इन्हें धरोसींवा स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया था।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने लोगों को बैंक में सुरक्षित निवेश और ज्यादा रिटर्न का लालच देकर एफडी कराने के नाम पर रकम जमा करवाई। निवेशकों को बैंक जैसी दिखने वाली नकली एफडी रसीदें सौंप दी गईं, जिससे लंबे समय तक किसी को शक नहीं हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ निवेशकों ने अपनी एफडी की मैच्योरिटी और भुगतान की जानकारी बैंक से मांगी। जांच में सामने आया कि संबंधित एफडी बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थीं। इसके बाद पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई।
सूत्रों के मुताबिक, फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए धरोसींवा के एक प्रिंटिंग सेंटर का इस्तेमाल किया गया। वहां बैंक जैसी डिजाइन और प्रारूप में नकली एफडी रसीदें छापी गईं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जीवाड़े में कुछ बैंक कर्मियों या अंदरूनी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने जांच को कैश किया या प्रक्रिया में सहयोग किया, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी सुरक्षित निवेश समझकर बैंक में लगाई थी, लेकिन अब उन्हें पैसे वापस मिलने की चिंता सता रही है। मामले में पुलिस और बैंक प्रबंधन दोनों स्तर पर जांच जारी है।
फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

