प्लास्टिक बैन पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बाजार में सामग्री की बिक्री पर उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में प्लास्टिक के एकल-उपयोग (सिंगल-यूज) प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद बाजार में प्लास्टिक सामग्री कैसे धड़ल्ले से बिक रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को तय की गई है, जिसमें प्रशासन को विस्तृत जवाब देना होगा। यह आदेश पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।
पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार द्वारा एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के बाद, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए थे। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विभिन्न शहरों और कस्बों में आज भी प्लास्टिक की थैलियां, डिस्पोजेबल कप, प्लेटें और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हैं। इस स्थिति को देखते हुए, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है और प्रशासन से जवाब मांगा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है।
विस्तृत जानकारी
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी और न्यायमूर्ति संजय एस. अग्निहोत्री की युगलपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रतिबंध का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। लेकिन, यदि प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक सामग्री का खुलेआम व्यापार जारी है, तो यह आदेशों की अवहेलना है। कोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि ऐसे कौन से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं जिससे प्रतिबंध का सख्ती से पालन हो सके। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि प्रतिबंध के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की जा रही है और क्या इसके लिए कोई विशेष निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है।
मुख्य बिंदु
- एकल-उपयोग प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध का सख्ती से पालन न होना।
- बाजारों में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री की उपलब्धता।
- हाईकोर्ट द्वारा प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग।
- प्रतिबंध के उल्लंघन पर की जाने वाली कार्रवाई का विवरण मांगा गया।
प्रभाव और आगे की स्थिति
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख से यह उम्मीद जगी है कि प्लास्टिक प्रतिबंध को लेकर प्रशासन अधिक गंभीर होगा। आने वाली सुनवाई में यदि प्रशासन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो कोर्ट और भी सख्त कदम उठा सकता है। यह न केवल पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह आम जनता को भी प्लास्टिक के उपयोग के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। उम्मीद है कि इस बार प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर, जमीनी स्तर पर भी प्रभावी ढंग से लागू होगा, जिससे प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सके।
ताज़ा खबरों के लिए CGTOP36.com पर बने रहें।

