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छत्तीसगढ़ के धान खरीदी मॉडल की महाराष्ट्र में धूम, फडणवीस के निर्देश पर विधायक दल करेगा अध्ययन
रायपुर: छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई धान खरीदी की व्यवस्था की अब महाराष्ट्र में भी चर्चा हो रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छत्तीसगढ़ के इस मॉडल से इतने प्रभावित हुए हैं कि उन्होंने राज्य के विधायकों के एक दल को इसका अध्ययन करने के लिए रायपुर भेजने का निर्देश दिया है। यह दल 19 जून को रायपुर पहुंचेगा और छत्तीसगढ़ की धान खरीदी प्रक्रिया को करीब से देखेगा।
पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़, जिसे धान का कटोरा भी कहा जाता है, अपनी मजबूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और किसानों से धान की खरीद के लिए एक सुव्यवस्थित मॉडल के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य सरकार ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बिचौलियों को खत्म करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस मॉडल की सफलता की गूंज अब पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र तक भी पहुंच गई है, जहां के नेता छत्तीसगढ़ की व्यवस्था से प्रेरणा लेना चाहते हैं।
विस्तृत जानकारी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की और वे इससे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने इस मॉडल की बारीकियों को समझने के लिए अपने राज्य के विधायकों का एक दल भेजने का फैसला किया है। यह दल 19 जून को रायपुर पहुंचेगा और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के साथ बैठकें करेगा। वे धान खरीदी केंद्रों का दौरा करेंगे, किसानों से बातचीत करेंगे और पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास करेंगे। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या महाराष्ट्र में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है, जिससे राज्य के किसानों को लाभ मिल सके।
मुख्य बिंदु
- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छत्तीसगढ़ के धान खरीदी मॉडल से प्रभावित।
- 19 जून को महाराष्ट्र के विधायकों का दल रायपुर का करेगा दौरा।
- दल धान खरीदी केंद्रों का करेगा निरीक्षण और किसानों से करेगा बातचीत।
- उद्देश्य: महाराष्ट्र में धान खरीदी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ मॉडल का अध्ययन।
प्रभाव और आगे की स्थिति
महाराष्ट्र के विधायकों के इस दौरे से छत्तीसगढ़ के धान खरीदी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है। यदि महाराष्ट्र इस मॉडल को सफलतापूर्वक अपनाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र में सुधार की नई राहें खुलेंगी। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी सफलताओं को साझा करने और अन्य राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।
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