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कोल लेवी केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की जमानत याचिका खारिज, 13 करोड़ की अवैध वसूली में था शामिल
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी केस में आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने शराब व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला मामले की गंभीरता और आरोपी की संलिप्तता को देखते हुए लिया गया है। आरोपी पर 13 करोड़ रुपये की अवैध वसूली में शामिल होने का आरोप है, जो कोयला खदानों से लेवी के नाम पर की गई थी।
पृष्ठभूमि
यह मामला छत्तीसगढ़ में कोयला लेवी के नाम पर की गई करोड़ों रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई थी कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा कोयला खदानों से लेवी के रूप में बड़ी रकम वसूली जा रही थी। इस मामले में कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं और जांच अभी भी जारी है। सूर्यकांत तिवारी इस मामले में मुख्य आरोपियों में से एक माने जाते हैं, और उनके ड्राइवर की भूमिका भी अहम बताई जा रही है।
विस्तृत जानकारी
सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर ने इस मामले में अपनी गिरफ्तारी के बाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि वह केवल एक ड्राइवर है और उसका इस अवैध वसूली से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में मजबूत सबूत पेश किए, जिनमें आरोपी की संलिप्तता को दर्शाया गया था। ईडी ने बताया कि ड्राइवर न केवल वसूली की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में शामिल था, बल्कि कुछ मामलों में वह सीधे तौर पर वसूली प्रक्रिया का हिस्सा भी था। अदालत ने ईडी द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों और दलीलों को सुनने के बाद यह पाया कि आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
मुख्य बिंदु
- कोल लेवी केस में हाईकोर्ट ने सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की जमानत याचिका खारिज की।
- आरोपी पर 13 करोड़ रुपये की अवैध वसूली में शामिल होने का आरोप है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में आरोपी की संलिप्तता के पुख्ता सबूत पेश किए।
- यह फैसला मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूती देगा।
प्रभाव और आगे की स्थिति
इस फैसले का कोल लेवी केस की जांच पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह दर्शाता है कि अदालतें ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही हैं और आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। सूर्यकांत तिवारी और इस मामले के अन्य आरोपियों की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। यह फैसला उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में अपनी जांच को और तेज करेगा और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने का प्रयास करेगा।
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