कृषि मंत्री ने रामपुर एमएम हेचरी का किया निरीक्षण, 11 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादन की क्षमता
रामपुर, छत्तीसगढ़। कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने आज रामपुर स्थित एमएम हेचरी का विस्तृत निरीक्षण किया। यह हेचरी 65 एकड़ के विशाल जलक्षेत्र में फैली हुई है और मत्स्य पालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। मंत्री श्री नेताम ने हेचरी की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने मत्स्य बीज उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा पर विशेष जोर दिया।
पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके और प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़े। एमएम हेचरी, रामपुर, इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह हेचरी न केवल स्थानीय मछुआरों को उन्नत किस्म के मत्स्य बीज उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने में सहायक है। मंत्री श्री नेताम का यह निरीक्षण इस क्षेत्र के विकास में सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
विस्तृत जानकारी
निरीक्षण के दौरान, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने हेचरी के विभिन्न अनुभागों का दौरा किया, जिसमें मत्स्य बीज उत्पादन इकाई, हैचिंग यूनिट और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला शामिल थे। उन्होंने अधिकारियों से हेचरी की वर्तमान उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह पता चला कि 65 एकड़ के जलक्षेत्र में विकसित इस हेचरी में तेलापिया, पगेशियस और रोहु जैसी प्रमुख प्रजातियों के सालाना 11 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन करने की क्षमता है। मंत्री ने उत्पादन प्रक्रिया की बारीकियों को समझा और मत्स्य पालकों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया।
मुख्य बिंदु
- रामपुर स्थित एमएम हेचरी का कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम द्वारा निरीक्षण।
- 65 एकड़ जलक्षेत्र में विकसित हेचरी की उत्पादन क्षमता 11 करोड़ मत्स्य बीज प्रति वर्ष।
- तेलापिया, पगेशियस और रोहु प्रजातियों के मत्स्य बीज का उत्पादन।
- मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर।
प्रभाव और आगे की स्थिति
कृषि मंत्री के इस निरीक्षण से एमएम हेचरी के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के बाद हेचरी के आधुनिकीकरण और विस्तार की दिशा में और अधिक कदम उठाए जाएंगे। 11 करोड़ मत्स्य बीज के सालाना उत्पादन की क्षमता प्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। सरकार का लक्ष्य मत्स्य बीज की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उत्पादन को अधिकतम करना है, ताकि छत्तीसगढ़ मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके।
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