Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के मरवाही वनमंडल अंतर्गत जंगलों में अवैध कटाई का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पर्यावरण संरक्षण और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरेला वन परिक्षेत्र के पीपरखूंटी बीट में तस्करों ने इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन का उपयोग कर सागौन, साल और सरई जैसे बेशकीमती पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई कर दी। जानकारी के अनुसार, यह अवैध कटाई पिछले दो से तीन महीनों से लगातार चल रही थी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने लगभग दो महीने पहले ही इस गतिविधि की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही का फायदा उठाकर तस्करों ने जंगल में बेरोकटोक पेड़ों की कटाई जारी रखी। मामला जब रायपुर तक पहुंचा, तब स्टेट फ्लाइंग स्क्वाड की टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। टीम की प्रारंभिक जांच में जंगल के अंदर 120 से अधिक सागौन और साल के ठूंठ पाए गए।
जिससे पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों को आशंका है कि वास्तविक रूप से कटे पेड़ों की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। यह क्षेत्र मरवाही वनमंडल मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग के पास होने के बावजूद इतनी बड़ी अवैध कटाई का सामने आना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी तस्करी संभव नहीं है। मामले में वन विभाग के उड़नदस्ता और डिप्टी रेंजर ने भी स्वीकार किया है कि क्षेत्र में अवैध कटाई हुई है और विभाग को समय पर इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। इस स्वीकारोक्ति के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल रायपुर से आई फ्लाइंग स्क्वाड टीम पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कटाई के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और किस स्तर पर लापरवाही हुई है। स्थानीय स्तर पर यह मामला अब बड़ा मुद्दा बन गया है और लोगों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे वह लकड़ी तस्कर हों या वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी। जांच के बाद बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

