Delhi News : दिल्ली। हर्निया एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसे लोग अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और सही समय पर उपचार से हर्निया का प्रभावी प्रबंधन संभव है और मरीज सामान्य जीवन तेजी से वापस पा सकते हैं।
क्या है हर्निया?
हर्निया तब होता है जब शरीर का कोई अंग या टिश्यू मांसपेशियों के कमजोर हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगता है। भारी वजन उठाना, मोटापा, लगातार खांसी या पुरानी सर्जरी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के आंकड़ों के मुताबिक, वंक्षण हर्निया जीवनभर में करीब 27% पुरुषों और 3% महिलाओं को प्रभावित करता है।
शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी-
विशेषज्ञों के अनुसार, हर्निया अक्सर पेट या कमर में हल्की सूजन, खिंचाव, भारीपन या लंबे समय तक खड़े रहने पर दबाव महसूस होने जैसे लक्षणों से शुरू होता है। शुरुआत में दर्द कम होने के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है।
समय पर इलाज से आसान होता है उपचार-
हीलिंग हैंड्स अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. परमेश्वर भामरुले ने बताया कि कई मरीज छोटी सूजन को सामान्य समझ लेते हैं, जबकि समय रहते इलाज कराने पर सर्जरी आसान और रिकवरी तेज हो जाती है। आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों से अब छोटे चीरे के जरिए इलाज संभव है, जिससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।
देरी बन सकती है खतरा-
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इलाज में देरी होने पर इन्कार्सिरेशन और स्ट्रैंगुलेशन जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें तुरंत सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
डीवाई पाटिल अस्पताल, पुणे के डॉ. विनायक क्षीरसागर के अनुसार, हर्निया का इलाज केवल सूजन हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीज की जीवन गुणवत्ता सुधारने और भविष्य की जटिलताओं से बचाने के लिए भी जरूरी है।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय-
विशेषज्ञ स्वस्थ वजन बनाए रखने, भारी वजन उठाने से बचने और लगातार खांसी का समय पर इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता, शीघ्र जांच और सही समय पर उपचार ही हर्निया से सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर तरीका है।

