Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को डराकर और भ्रमित कर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक 74 वर्षीय रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर को साइबर ठगों ने करीब 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1 करोड़ 28 लाख रुपए की ठगी कर ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वर्णभूमि निवासी स्वप्न कुमार सेन के पास कुछ दिन पहले एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठग ने दावा किया कि स्वप्न कुमार सेन के नाम से मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज है और उनके बैंक खातों की जांच चल रही है। इतना ही नहीं, उन्हें गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने का डर भी दिखाया गया।
साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहकर पीड़ित को मानसिक रूप से डराए रखा। उन्हें किसी से बात न करने, घर से बाहर न निकलने और पुलिस या परिजनों से संपर्क न करने की हिदायत दी गई। इसी को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है, जिसमें पीड़ित को मानसिक दबाव में रखकर ठगी की जाती है। ठगों ने कहा कि यदि जांच में सहयोग करना है तो अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने होंगे, ताकि “लेन-देन की जांच” की जा सके। डर और तनाव में आए स्वप्न कुमार सेन ने ठगों के बताए खातों में कुल 1 करोड़ 28 लाख रुपए जमा कर दिए। करीब 10 दिनों तक चले इस खेल के बाद जब ठगों का संपर्क बंद हुआ, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
इसके बाद स्वप्न कुमार सेन ने पूरे मामले की शिकायत विधानसभा थाना में दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल भी इस ठगी में शामिल खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुंबई क्राइम ब्रांच या किसी भी जांच एजेंसी द्वारा इस तरह फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। यह पूरी तरह साइबर ठगी का नया तरीका है। लोगों से अपील की गई है कि किसी भी अनजान कॉल, गिरफ्तारी की धमकी या पैसों की मांग पर तुरंत सतर्क रहें और नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन में शिकायत करें।

