प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Photo)
नई दिल्ली: केंद्र सरकार (Union Government) ने देश के चुनावी ढांचे में आमूलचूल बदलाव लाने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार ने सांसदों को ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ (Constitution (131 Amendment) Bill, 2026) का मसौदा जारी किया है, जिसमें लोकसभा की सीटों (Lok Sabha Seats) की संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इस बड़े विस्तार का मुख्य उद्देश्य बहुप्रतीक्षित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को 2029 के लोकसभा चुनावों (2029 Lok Sabha Elections) से पहले प्रभावी ढंग से लागू करना है. इस महत्वपूर्ण संशोधन पर चर्चा के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. यह भी पढ़ें: Women’s Reservation Bill: पीएम मोदी ने उत्तराखंड से की महिला आरक्षण विधेयक के लिए सर्वसम्मति की अपील, 2029 से पहले लागू करने का लक्ष्य
लोकसभा की नई संरचना: 850 सीटों का गणित
विधेयक के अनुसार, लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या अब 850 होगी, जो भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा विस्तार होगा.
- राज्यों का प्रतिनिधित्व: प्रस्तावित 850 सीटों में से 815 सदस्य सीधे राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से चुनकर आएंगे.
- केंद्र शासित प्रदेश: केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए अधिकतम 35 सीटों का प्रावधान किया गया है.
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में 530 सांसद राज्यों का और 20 सांसद केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
इस विस्तार के साथ ही निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) किया जाएगा, ताकि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जा सके.
815 सीधे निर्वाचित सांसद: लोकतंत्र की मजबूती
प्रस्ताव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि 815 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होंगे, जिससे प्रतिनिधि लोकतंत्र और सशक्त होगा. सीटों की संख्या में यह वृद्धि महिला आरक्षण के लिए आवश्यक जगह बनाने में भी मदद करेगी. विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे सीटों के आवंटन में परिसीमन आयोग की भूमिका और स्पष्ट हो जाएगी. इसमें आरक्षित सीटों के रोटेशन (बारी-बारी से बदलाव) का भी प्रावधान है. यह भी पढ़ें: Women’s Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद के विशेष सत्र से जगी उम्मीदें, नेताओं और दिग्गजों ने आम सहमति की अपील की
2011 की जनगणना: महिला आरक्षण की राह हुई आसान
महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक बदलाव किया है. नए संशोधन के तहत, परिसीमन और सीट आवंटन के लिए ‘जनसंख्या’ के निर्धारण का अधिकार संसद के पास होगा. सरकार ने भविष्य की जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने की योजना बनाई है.
इस कदम से भविष्य की जनगणना में होने वाली देरी की बाधा समाप्त हो जाएगी. 2011 की जनगणना को आधार मानकर सरकार का लक्ष्य 2029 के चुनावों तक महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा सुनिश्चित करना है.
राजनीतिक सहमति की अपील
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जोर देकर कहा है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने इसे महिलाओं के लिए न्याय और समान प्रतिनिधित्व का विषय बताया है. विशेष सत्र के दौरान सरकार इस ऐतिहासिक सुधार पर सभी दलों के बीच व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेगी. यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह भारतीय संसदीय लोकतंत्र के स्वरूप को पूरी तरह बदल देगा.

