गिरीश गुप्ता गरियाबंद/धमतरी, 3 अक्टूबर 2026। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में वन्यजीवों के अवैध शिकार के लिए विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल के मामले में एंटी-पोचिंग यूनिट ने बड़ी कार्रवाई की है। टाइगर रिजर्व के चिखलापानी क्षेत्र में कथित तौर पर पोटाश बम का इस्तेमाल कर जंगली सूअर का शिकार करने के आरोप में ओडिशा के नबरंगपुर जिले के दो लोगों को पकड़ा गया है। कार्रवाई के दौरान मौके से 13 जिंदा पोटाश बम सहित शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले कई औजार बरामद किए गए।
वन विभाग के अनुसार यह कार्रवाई 29 सितंबर 2026 को रिसगांव परिक्षेत्र के आरएफ कक्ष क्रमांक 254 और 255, छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे चिखलापानी क्षेत्र में की गई। मैदानी सूचना के आधार पर USTR की टीम ने नबरंगपुर जिले के खिलौली गांव निवासी नरसिंह, उम्र करीब 50 वर्ष और मान सिंह, उम्र करीब 22 वर्ष को पकड़ा। बताया गया कि दो अन्य व्यक्ति मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश और जांच जारी है।
जंगली सूअर के शिकार के आरोप में पकड़े गए
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दोनों आरोपियों को कथित तौर पर विस्फोटक का इस्तेमाल कर जंगली सूअर का शिकार करने और उसके शव को काटने की स्थिति में पकड़ा गया। मौके से 13 जिंदा पोटाश बम के अलावा टंगिया, चाकू, हंसिया और कट्टा समेत अन्य शिकार सामग्री जब्त की गई।
मामले में POR क्रमांक 70/22, दिनांक 29 सितंबर 2026 के तहत वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं में वन अपराध दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को 1 अक्टूबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
विस्फोटक सामग्री बेचने वाले को नोटिस
जांच में सामने आए एक अन्य व्यक्ति भारत पिता रामजी राठौर, निवासी कोहराबेड़ा, थाना विश्रामपुरी, जिला कोंडागांव को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के कारण उसकी गिरफ्तारी के बजाय BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किया गया है।
20 से ज्यादा लोगों पर पहले भी कार्रवाई
USTR की एंटी-पोचिंग यूनिट के मुताबिक टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में वन्यजीवों के शिकार के लिए विस्फोटकों के कथित इस्तेमाल और निर्माण से जुड़े 20 से अधिक लोगों को पहले पकड़ा या हिरासत में लिया जा चुका है।
एक पूर्व मामले में नगरी, धमतरी निवासी प्रकाश नेताम के परिसर की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के साथ 86 स्लॉथ-बियर के पंजे/नाखून बरामद किए जाने का भी उल्लेख प्रेस विज्ञप्ति में किया गया है। विभाग का कहना है कि इससे वन्यजीवों के अवैध शिकार में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल की आशंका सामने आती है।
तलाशी में 29 कारतूस और संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली
ताजा मामले में पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर एक आरोपी से संबंधित परिसर में संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान हथियार संबंधी सामग्री, 29 कारतूस, दो बम/पटाखा प्रकार की सामग्री, 20 टिकली पटाखे और अलग-अलग मात्रा में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
बरामद संदिग्ध सामग्री में करीब 200 ग्राम, 230 ग्राम, 100 ग्राम और 8 ग्राम की मात्रा शामिल होने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है। मामले में विस्फोटक सामग्री के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर आगे की जांच जारी है।
Explosive Substances Act के तहत भी होगी कार्रवाई
USTR ने स्पष्ट किया है कि जहां तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं, वहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के साथ-साथ Explosive Substances Act, 1908 की लागू धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
इसका उद्देश्य अवैध शिकार के अलावा विस्फोटक पदार्थों के अवैध कब्जे, निर्माण या इस्तेमाल से जुड़े संभावित अपराधों की भी जांच करना है।
वन्यजीवों के साथ गश्ती दलों के लिए भी खतरा
USTR के अनुसार पोटाश बम का इस्तेमाल केवल वन्यजीवों के लिए ही खतरा नहीं है। ऐसे विस्फोटक उपकरणों के कारण दूसरे वन्यजीव, मवेशी और जंगल में गश्त करने वाले वन विभाग तथा पुलिस के जवान भी खतरे में पड़ सकते हैं।
विभाग ने यह भी चिंता जताई है कि घायल या लगातार परेशान किए गए वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। ऐसे जानवर मानव बस्तियों या कृषि क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर भी जोर
USTR के अनुसार अवैध शिकार से घायल या विस्थापित वन्यजीवों की गतिविधियों में बदलाव होने से इंसानों के साथ उनका सामना बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में वन्यजीवों के प्रति प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की परिस्थितियां भी बन सकती हैं।
इसी वजह से टाइगर रिजर्व प्रबंधन विस्फोटकों से होने वाले अवैध शिकार को केवल वन्यजीव अपराध नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी मान रहा है।
ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील
टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने स्थानीय समुदायों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री या शिकार के उपकरण दिखाई दें अथवा रात के समय शिकार जैसी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
गोपनीय सूचना देने और नियमानुसार पुरस्कार प्राप्त करने के लिए USTR के उप निदेशक से 7568127875 नंबर पर संपर्क करने की अपील की गई है।
इस कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस के साइबर सपोर्ट के साथ USTR के अधिकारियों, एंटी-पोचिंग टीम और रिसगांव परिक्षेत्र के गश्ती एवं सुरक्षा कर्मचारियों की भूमिका रही।

