रायपुर/चंपारण। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्थिति सवाल खड़े कर रही है। रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चंपारण में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत लगभग 4.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन यहां पर्यटकों के लिए विकसित की गई कई सुविधाएं अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं। स्थिति यह है कि शाम होते ही परिसर अंधेरे में डूब जाता है और कैफेटेरिया व शौचालय जैसी सुविधाओं पर ताले लटकते नजर आते हैं।
चंपारण धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां भगवान श्रीराम की करीब 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रतिमा के साथ-साथ राम वाटिका, पर्यटक सूचना केंद्र, कैफेटेरिया, शौचालय, पाथवे, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का निर्माण कराया गया।
इन विकास कार्यों पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। तस्वीरें और मौके की स्थिति इस बात की ओर इशारा करती हैं कि निर्माण के बाद भी व्यवस्थाओं का नियमित संचालन और रखरखाव बड़ी चुनौती बना हुआ है।
शाम होते ही छा जाता है अंधेरा
स्थानीय स्तर पर सामने आई स्थिति के मुताबिक, दिन के समय परिसर में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन शाम होते ही यहां व्यवस्थाएं कमजोर नजर आती हैं। करीब शाम 7 बजे के बाद परिसर में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से अंधेरा छा जाता है। ऐसे में परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि जिस स्थान को धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, वहां शाम के समय प्रकाश व्यवस्था का प्रभावी रूप से संचालित नहीं होना पूरे प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर सवाल खड़ा करता है।
कैफेटेरिया और शौचालय पर ताला
पर्यटन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए कैफेटेरिया और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। लेकिन मौके पर ये सुविधाएं बंद मिलीं। कैफेटेरिया और शौचालय पर ताला होने के कारण पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटन स्थल विकसित करने का उद्देश्य केवल भवन और संरचनाएं खड़ी करना नहीं होता, बल्कि उनका नियमित संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि पर्यटक सुविधा केंद्र, कैफेटेरिया और सार्वजनिक शौचालय उपयोग में ही नहीं आ रहे हैं तो करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य का वास्तविक लाभ पर्यटकों तक पहुंचना मुश्किल है।
उद्घाटन के बाद भी सुविधाएं अधूरी
चंपारण में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत कई निर्माण कार्य पूरे किए गए थे। वर्ष 2023 में यहां भगवान श्रीराम की प्रतिमा सहित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया था। उस समय सरकार की ओर से यहां रामवाटिका, दीप स्तंभ, भव्य प्रवेश द्वार, रामायण इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, पर्यटन सूचना केंद्र, गजीबो, लैंडस्केपिंग, बाउंड्रीवाल, विद्युतीकरण, प्लंबिंग और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाओं के विकास की जानकारी दी गई थी।
लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि निर्माण पर खर्च की गई राशि के बाद इन सुविधाओं का नियमित संचालन क्यों नहीं हो पा रहा है।
करोड़ों के प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर सवाल
राम वन गमन पर्यटन परिपथ को छत्तीसगढ़ में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा गया था। परियोजना के तहत राज्य के विभिन्न स्थानों को भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के आधार पर पर्यटन से जोड़ने की योजना बनाई गई थी।
हालांकि, पिछले कुछ समय से इस परियोजना को लेकर काम की गति, भुगतान और निर्माण की गुणवत्ता समेत कई सवाल उठते रहे हैं। मार्च 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार राम वन गमन पथ की करीब 137.45 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर सोशल ऑडिट और अनियमितताओं की जांच की प्रक्रिया चल रही थी तथा कई स्थानों पर काम अधूरा पड़ा था।
ऐसे में चंपारण की मौजूदा स्थिति भी इस बड़े प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पर्यटकों को सुविधाएं मिलना जरूरी
चंपारण आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए केवल भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। यहां आने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, साफ-सुथरे शौचालय, पीने के पानी, भोजन और बैठने की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यदि शाम होते ही पर्यटन स्थल अंधेरे में डूब जाए और शौचालय व कैफेटेरिया जैसी सुविधाओं पर ताले लगे रहें तो परियोजना के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मौके की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करे, बंद पड़ी सुविधाओं को तत्काल शुरू कराया जाए और प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को नियमित रूप से संचालित किया जाए, ताकि राम वन गमन पर्यटन परिपथ केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहकर वास्तव में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उपयोगी पर्यटन स्थल बन सके।

