रायपुर/नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के आयात की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही थोक कारोबारियों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक पर भी सीमा लागू की गई है।
चीनी की कीमतों में पिछले तीन महीनों के दौरान करीब 40 फीसदी यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर अब आम उपभोक्ताओं की रसोई पर भी दिखाई देने लगा है। रायपुर में बुधवार-गुरुवार के दौरान चीनी के दाम में एक ही दिन में करीब 6 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई।
तीन महीने में चीनी 40 फीसदी महंगी
रिपोर्ट के मुताबिक देश में पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम करीब 40 फीसदी बढ़े हैं। इसी अवधि में गुड़ 24 फीसदी, चावल 16 फीसदी और मक्के का आटा 11 फीसदी तक महंगा हुआ है।
रायपुर के बाजार में भी चीनी की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली। बुधवार शाम थोक और खुदरा बाजार में चीनी के भाव में बढ़ोतरी हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक खुदरा कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि इससे पहले यह करीब 64 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी। इसी तरह थोक बाजार में भी कीमत करीब 62 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।
कीमतों में इस तेज उछाल का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। चाय, मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ने की आशंका भी इससे बढ़ गई है।
25 लाख टन चीनी एथेनॉल में चली गई
चीनी की उपलब्धता कम होने की एक प्रमुख वजह एथेनॉल उत्पादन भी बताई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार 2025-26 सीजन में करीब 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया गया।
इसके कारण नए चीनी सीजन की शुरुआत में घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम रहा। रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में पेराई से पहले चीनी का शुरुआती स्टॉक करीब 47 लाख टन था, जबकि 2026-27 के पेराई सीजन से पहले यह घटकर करीब 32 लाख टन रह गया।
यानी शुरुआती स्टॉक में करीब 15 लाख टन की कमी आई है। यही वजह है कि बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर दबाव बढ़ा है।
सरकार ने 10 लाख टन आयात की अनुमति दी
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है। आयातित चीनी के बाजार में आने से आने वाले समय में आपूर्ति का दबाव कम होने और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही सरकार ने उन थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की है, जो हर महीने 10 टन से अधिक चीनी खरीदते हैं। ऐसे कारोबारियों को अपनी जरूरत के मुताबिक ही स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
2026-27 में उत्पादन बढ़ने का अनुमान
सरकार और उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 2026-27 सीजन में गन्ने का कुल उत्पादन करीब 46.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वहीं चीनी का उत्पादन करीब 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 फीसदी अधिक है।
अगर उत्पादन का यह अनुमान सही साबित होता है तो आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। हालांकि मौजूदा समय में शुरुआती स्टॉक कम होने के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
चार साल में चीनी निर्यात में बड़ी गिरावट
चीनी के कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। वाणिज्यिक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में करीब 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ था। इसके बाद निर्यात में लगातार कमी आई।
2023-24 में करीब 51.35 लाख टन निर्यात किया गया, जबकि 2024-25 में यह घटकर करीब 38.43 लाख टन रह गया। 2026-27 में चीनी के निर्यात का आंकड़ा लगभग शून्य रहने का अनुमान जताया गया है।
इसका एक कारण घरेलू मांग और उपलब्धता को प्राथमिकता देना भी माना जा रहा है।
उद्योग ने कहा- चीनी की कमी नहीं, स्टॉक कम होने से बढ़ी कीमत
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक बाजार में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि तेजी का कारण रणनीतिक और पैनिक बाइंग है। उनके अनुसार सामान्य परिस्थितियों में करीब 35 से 40 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक पर्याप्त माना जाता है।
वहीं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स से जुड़े केंद्रीय मंत्री शंकर ठक्कर का कहना है कि संगठन पिछले तीन साल से चीनी के गन्ने को एथेनॉल में इस्तेमाल करने की नीति में बदलाव की मांग करता रहा है।
आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ चाय और घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, बिस्किट, पेय पदार्थ, आइसक्रीम, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए जाने के बाद बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। यदि घरेलू उत्पादन अनुमान के मुताबिक रहा और आयातित चीनी समय पर बाजार में पहुंची, तो आने वाले समय में कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
फिलहाल रायपुर समेत कई बाजारों में चीनी के बढ़े हुए दाम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा रहे हैं। सरकार के नए फैसले के बाद अब बाजार की निगाहें इस बात पर हैं कि 10 लाख टन आयातित चीनी बाजार में कब पहुंचती है और इसका कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

