रायपुर। छत्तीसगढ़ की पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर स्टेट ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायतों में बोरवेल और नलकूप खनन कार्यों में 12.48 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई है। इसके अलावा करीब 5.16 करोड़ रुपये के भुगतान को संदिग्ध बताया गया है।
ऑडिट रिपोर्ट में पंचायतों द्वारा विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि के उपयोग के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई मामलों में नियमों के विपरीत मदों में राशि खर्च किए जाने की बात सामने आई है।
बिना मजदूर और मस्टर रोल के निर्माण कार्य का भुगतान
स्टेट ऑडिट में पाया गया कि कई पंचायतों में बिना मजदूर और बिना मस्टर रोल के ही निर्माण कार्य पूरा दिखाकर भुगतान कर दिया गया। जिन मदों की राशि गांवों के विकास कार्यों पर खर्च होनी थी, उनका उपयोग नियमों के विपरीत आयोजनों, सरकारी कार्यक्रमों और वाहन किराए जैसी मदों में किए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में है।
ऑडिट रिपोर्ट में बोरवेल और नलकूप खनन से संबंधित कार्यों में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
सरकारी मशीनें छोड़ निजी फर्मों से खुदवाए बोरवेल
ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक पंचायतों में नलकूप और बोरवेल खनन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली से संचालित करीब 50 रिग मशीनें जिला कार्यालयों के निर्देश पर नलकूप खनन का काम करती हैं।
इसके बावजूद कई पंचायतों ने सरकारी मशीनों का उपयोग करने के बजाय निजी फर्मों से नलकूप और बोरवेल खुदवाए। इससे संबंधित भुगतान और प्रक्रिया पर ऑडिट ने सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नलकूप खनन की शासकीय सुविधा का उपयोग नहीं कर पंचायतों ने मनमाने तरीके से अधिकृत निजी खनन एजेंसी या फर्म से काम कराया। हालांकि नलकूप खनन कार्य की नस्ती में निजी फर्मों के बिल तो मिले, लेकिन तकनीकी परीक्षण, माप पुस्तिका, गुणवत्ता सत्यापन और भंडार क्रय नियमों के पालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं मिले।
12.48 करोड़ की अनियमितता, 5.16 करोड़ का भुगतान संदिग्ध
स्टेट ऑडिट रिपोर्ट में बोरवेल और नलकूप खनन से जुड़े मामलों में 12.48 करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। वहीं करीब 5.16 करोड़ रुपये के भुगतान को संदिग्ध बताया गया है।
ऑडिट के मुताबिक ग्राम, जनपद और जिला पंचायतों में नलकूप एवं बोरवेल खनन कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। रिपोर्ट में संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया के पालन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
जिस काम पर प्रतिबंध, उसी पर 3.08 करोड़ खर्च
रिपोर्ट का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा पंचायतों की राशि के उपयोग से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाले अनुदान के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे।
इन निर्देशों के अनुसार राशि का उपयोग सम्मान-सांस्कृतिक कार्यक्रम, सजावट, उद्घाटन, कर्मचारियों के वेतन/मानदेय तथा अन्य प्रतिबंधित मदों में नहीं किया जा सकता था।
इसके बावजूद ऑडिट में ऐसे खर्च सामने आए हैं, जिनमें मनोरंजन, वाहन और एयर कंडीशनर जैसी मदों पर राशि खर्च किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधित मदों में करीब 3.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
विकास कार्यों की राशि के उपयोग पर उठे सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए जारी राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिन मदों के लिए राशि निर्धारित की गई थी, कई जगह उनका उपयोग दूसरे कार्यों में किया गया।
इस तरह के खर्च से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि के वास्तविक उपयोग पर सवाल खड़े होते हैं। ऑडिट ने संबंधित पंचायतों में खर्च की प्रक्रिया, दस्तावेजों और नियमों के पालन की जांच की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
सरकारी मशीनरी के बावजूद निजी एजेंसियों से काम क्यों?
बोरवेल और नलकूप खनन के मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी स्तर पर रिग मशीनों की सुविधा उपलब्ध थी, तो पंचायतों ने निजी फर्मों से काम क्यों कराया।
ऑडिट में निजी फर्मों के बिल मिलने के बावजूद तकनीकी परीक्षण, माप पुस्तिका और गुणवत्ता सत्यापन जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने की बात कही गई है। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और काम की गुणवत्ता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की जरूरत
स्टेट ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए इन मामलों के बाद संबंधित पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत सामने आती है। खासकर बोरवेल-नलकूप खनन में करोड़ों रुपये के भुगतान और प्रतिबंधित मदों में खर्च की गई राशि की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि पंचायतों में विकास योजनाओं की राशि के उपयोग और नलकूप-बोरवेल खनन की प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत खामियां सामने आई हैं। संबंधित विभागों की जांच और कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और सरकारी राशि की वसूली अथवा अन्य कार्रवाई किस स्तर पर की जाती है।

