गिरीश गुप्ता गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन विभाग ने अवैध सागौन की लकड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत कोयबा के पंचायत सचिव मनोज कुमार साहू के घर पर छापा मारकर भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी और उससे बने दो पलंग-पाटा जब्त किए हैं। कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की। मामले में भारतीय वन अधिनियम और काष्ठ चिरान अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
वन विभाग के अनुसार, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक गुरूनाथन एन. तथा उप संचालक वरुण जैन के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। सहायक संचालक गोपाल कश्यप द्वारा जारी सर्च वारंट (क्रमांक-20, दिनांक 4 अगस्त 2026) के आधार पर अधिकारियों की टीम इंदागांव स्थित पंचायत सचिव के निजी आवास पहुंची।

घर की तलाशी में मिला अवैध सागौन
वन विभाग की टीम ने जब मकान की तलाशी ली तो वहां बड़ी मात्रा में अवैध रूप से रखा गया सागौन का चिरान और उससे बने फर्नीचर बरामद हुए। अधिकारियों ने मौके पर पंचनामा तैयार कर पूरी सामग्री जब्त कर ली।
जब्त सामग्री
- सागौन चिरान – 15 नग
- सागौन के पलंग-पाटा – 2 नग
- कुल आयतन – 0.367 घन मीटर
पूरी कार्रवाई स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में नियमानुसार की गई।

वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज
वन विभाग ने पंचायत सचिव मनोज कुमार साहू के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम, 1927 एवं काष्ठ चिरान अधिनियम, 1984 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जब्त लकड़ी के स्रोत और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
इस कार्रवाई में इंदागांव परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार सागर, दक्षिण उदंती परिक्षेत्र अधिकारी चंद्रबली ध्रुव, उपवनक्षेत्रपाल राकेश सिंह परिहार, वनरक्षक मनोज ध्रुव, वीरेंद्र कुमार ध्रुव, टकेश्वर देवांगन, रुस्तम यादव, रामकृष्ण साहू, जय ललिता ध्रुव, पामेश्वरी, पेट्रोलिंग श्रमिक देवीसिंग यादव, पुनीत राम ध्रुव, जानकी बाई ठाकुर सहित सुरक्षा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वन विभाग का सख्त संदेश
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन संपदा की अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। विभाग का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी पद पर हो, अवैध वन कारोबार में लिप्त पाए जाने पर बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह के मामलों में आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

