छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में 85 परिवारों पर बेदखली की कार्रवाई को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। जिला प्रशासन ने गांव के भाटापारा इलाके में कथित सरकारी जमीन पर बने मकानों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की है। इसके लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात किए गए। ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और अपने घरों को बचाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 30 से 40 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं। उनका दावा है कि यह उनके पूर्वजों की जमीन है और कई परिवारों के पास भूमि से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि करीब 30 मकान सरकारी योजनाओं के तहत बने हैं, जबकि कई घरों में बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। ऐसे में अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जाना अन्यायपूर्ण है।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनी नोटिस देने के बाद की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित परिवारों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें कानूनी अपील का अवसर भी दिया गया था।
कार्रवाई के दौरान गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। कई ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और कार्रवाई रोकने की मांग की। कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीणों ने हस्तक्षेप की अपील की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर वे वर्षों से रह रहे हैं, वहां भविष्य में विधायक कॉलोनी बनाने की योजना है। हालांकि प्रशासन ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल बेदखली की कार्रवाई और ग्रामीणों का विरोध दोनों जारी हैं।

