रायपुर। राजधानी रायपुर के माना थाना क्षेत्र के नकटी गांव स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबे 24 वर्षीय आदिल खान का शव तीसरे दिन शुक्रवार को भी बरामद नहीं हो सका। बुधवार शाम दोस्तों के साथ खदान पहुंचे आदिल के गहरे पानी में डूबने के बाद से लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन पानी की अत्यधिक गहराई के कारण अब तक सफलता नहीं मिली है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना के बाद से 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आदिल का कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
दोस्तों के साथ तैरने की लगी थी शर्त
पुलिस के अनुसार मौदहापारा निवासी आदिल खान अपने तीन दोस्तों के साथ बुधवार शाम नकटी स्थित ब्लू वाटर घूमने गया था। इसी दौरान दोस्तों के बीच खदान के एक छोर से दूसरे छोर तक तैरकर जाने की शर्त लगी। आदिल और उसका एक दोस्त पानी में कूदे। दोस्त तो तैरकर बाहर निकल आया, लेकिन आदिल गहरे पानी में चला गया और फिर वापस नहीं आया।
आदिल के काफी देर तक बाहर नहीं निकलने पर उसके दोस्तों ने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही माना पुलिस मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया।
रात में नहीं हो सका रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलने के बाद रात में ही तलाश शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन अंधेरा और खदान में पानी की अधिक गहराई रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बन गई। सुरक्षा कारणों से रात में अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। परिजन रात में ही तलाश शुरू कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन पुलिस और रेस्क्यू टीम ने उन्हें पानी की गहराई और अंधेरे का हवाला देते हुए समझाइश दी।
तीन मोटर बोट और गोताखोरों ने की तलाश
शुक्रवार को आदिल की तलाश के लिए तीन मोटर बोट और करीब एक दर्जन गोताखोरों की मदद ली गई। टीम ने खदान के अलग-अलग हिस्सों में सर्च अभियान चलाया, लेकिन पानी की गहराई के कारण शव तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। वार्ड के पार्षदों का कहना है कि नगर निगम और प्रशासन के पास ऐसा पर्याप्त उपकरण या संसाधन नहीं है, जिसकी मदद से करीब 400 फीट अंदर जाकर युवक की तलाश की जा सके। ऐसे में रेस्क्यू टीम को लगातार कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाना पड़ रहा है।
400 फीट गहराई सबसे बड़ी चुनौती
ब्लू वाटर खदान की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अत्यधिक गहराई है। बारिश के दौरान खदान में पानी भर जाने से यहां कई हिस्से बेहद गहरे हो जाते हैं। रेस्क्यू टीम के गोताखोरों के लिए इतनी गहराई में जाकर लंबे समय तक तलाश करना जोखिम भरा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन के पास अत्याधुनिक डीप-डाइविंग उपकरण और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होते तो तलाशी अभियान को और प्रभावी तरीके से चलाया जा सकता था। मामले ने एक बार फिर ब्लू वाटर में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्लू वाटर पहले भी बन चुका है जानलेवा
नकटी का ब्लू वाटर पहले भी कई लोगों की जान ले चुका है। उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक यहां डूबने से नौ लोगों की मौत हो चुकी है। आदिल का शव मिलने पर यह आंकड़ा 10 हो जाएगा।
अक्टूबर 2025 में भी टाटीबंध स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल के छात्र ब्लू वाटर पहुंचे थे। नहाने के दौरान जयेश साहू और मृदुल गहरे पानी में डूब गए थे और दोनों के शव बाद में बरामद किए गए थे। इससे पहले 2017 में 17 वर्षीय सुनैना, 2019 में मोहन बाघ तथा 2023 में भी कई युवकों की डूबने से मौत हो चुकी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार हादसों के बावजूद ब्लू वाटर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बारिश के बाद पुरानी खदान में पानी भरने से यह जगह देखने में तालाब जैसी दिखाई देती है, जिसके कारण लोग यहां घूमने और नहाने पहुंच जाते हैं। लेकिन पानी की वास्तविक गहराई और अंदर मौजूद खतरे का अंदाजा अधिकांश लोगों को नहीं होता।
घटना के बाद एक बार फिर मांग उठ रही है कि ब्लू वाटर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। खतरनाक हिस्सों की घेराबंदी, चेतावनी बोर्ड, निगरानी और आपातकालीन रेस्क्यू उपकरणों की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल आदिल खान के शव की तलाश जारी है। परिजनों की नजरें रेस्क्यू टीम पर टिकी हुई हैं और सभी को उम्मीद है कि जल्द ही तलाशी अभियान में सफलता मिलेगी।

