गिरिश गुप्ता
गरियाबंद:- महानदी के उद्गम क्षेत्र में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के करका अतिक्रमण क्षेत्र में छाल को चारों ओर से काटकर (गर्डलिंग) क्षतिग्रस्त किए गए पेड़ों को बचाने के लिए एक विशेष संरक्षण पहल की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत, कर्नाटक के श्री विजय निशांत, जो ‘प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन’ के माध्यम से वृक्ष संरक्षण के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं, अगले सप्ताह टाइगर रिजर्व का दौरा करेंगे। वे प्रभावित पेड़ों के उपचार, वृक्ष-सर्जरी तथा उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे।
करकाः एक दशक में अतिक्रमण का विस्तार और वन क्षरण
करका अतिक्रमण क्षेत्र का विस्तार वर्ष 2016 में 22 हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2026 में 102.47 हेक्टेयर हो गया है। इस प्रकार, एक दशक में अतिक्रमण का क्षेत्रफल चार गुने से भी अधिक हो गया है।हाल ही में किए गए DGPS-सक्षम ड्रोन सर्वेक्षण तथा वर्ष 2010 और 2016 की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट इमेजरी, जिनमें घने वन क्षेत्र परिलक्षित होते हैं, के तुलनात्मक अध्ययन से वर्ष 2016 से 2026 के बीच प्रभावित क्षेत्र में 1.25 लाख से अधिक पेड़ों के साफ किए जाने का अनुमान है। ये निष्कर्ष वन क्षरण की गंभीरता को दर्शाते हैं और वन पुनर्स्थापन, प्रभावी संरक्षण तथा करका क्षेत्र में अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोजन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।क्षेत्रीय निरीक्षणों के दौरान USTR को 3,500 से अधिक पेड़ गर्डलिंग से प्रभावित मिले हैं। इनमें मुख्य रूप से साल, बीजा और तेंदू के पेड़ शामिल हैं। गर्डलिंग की प्रक्रिया में पेड़ के तने के चारों ओर छाल की एक पट्टी हटा दी जाती है. जिससे पोषक तत्वों का परिवहन बाधित होता है और अंततः पेड़ की मृत्यु हो सकती है। कई पेड़ पिछले वर्षों से इस क्षति का सामना कर रहे हैं, जबकि कुछ पेड़ों पर हाल ही में गर्डलिंग किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि अतिक्रमण के विस्तार के उद्देश्य से भी पेड़ों को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया जा रहा है।
USTR के संरक्षण एवं वन पुनर्स्थापन प्रयास
इन चुनौतियों के बावजूद, मैदानी अमले में लगभग 65 प्रतिशत पद रिक्त होने के बावजूद USTR प्रशासन ने पिछले चार वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस दौरान वन संरक्षण दल पर पाँच घातक हमले भी हुए तथा प्रशासन को अत्याचार के निराधार आरोपों का सामना करना पड़ा।इन प्रयासों से बाघ, हाथी, भारतीय विशाल गिलहरी तथा मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसे वन्यजीवों के आवासों के संरक्षण और पुनर्स्थापन को बल मिला है।
गंभीर पारिस्थितिक चुनौतियों का सामना कर रहा यह टाइगर रिजर्व वन सुरक्षा को मजबूत करने, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों को पुनर्स्थापित करने तथा वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है। महानदी के उद्दूम क्षेत्र के रूप में इस बन परिदृश्य का संरक्षण जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिक सर्जरी
USTR द्वारा वर्ष 2022 में तौरेंगा रेंज में गर्डलिंग से प्रभावित पेड़ों को बचाने के लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया गया था। हालांकि, इस प्रयास में सफलता की दर लगभग 10 प्रतिशत रही। इस अनुभव ने पेड़ों के उपचार के लिए अधिक विशेषज्ञता, उन्नत तकनीकों और प्रभावी उपचार पद्धतियों की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
श्री विजय निशांत के प्रस्तावित दौरे के दौरान प्रभावित पेड़ों की स्थिति का आकलन किया जाएगा तथा यह पहचान की जाएगी कि किन पेड़ों को वैज्ञानिक हस्तक्षेप से बचाया जा सकता है। इसके लिए ब्रिज ग्राफ्टिंग सहित उपयुक्त वृक्ष-सर्जरी एवं पुनर्स्थापन तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।इस पहल के अंतर्गत USTR के मैदानी कर्मचारियों को भी विशेष उपचार प्रक्रियाओं, उपचार के बाद देखभाल तथा पेड़ों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के संबंध में प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
पारंपरिक वन ज्ञान और वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वय
वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के साथ-साथ USTR प्रशासन द्वारा टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले कुछ आदिवासी समुदायों एवं वनवासियों से भी परामर्श किया जा रहा है, ताकि पेड़ों की देखभाल और उपचार से संबंधित उनके पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान एवं स्थानीय अनुभवों का लाभ लिया जा सके।इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ पारंपरिक ज्ञान का समन्वय कर क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने की संभावनाओं को बढ़ाना तथा वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत करना है।इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन मूल्यवान पेड़ों को नष्ट होने से बचाना है, जिन्हें समय पर उचित हस्तक्षेप के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। वृक्ष-सर्जरी की विशेषज्ञ तकनीकों, वैज्ञानिक आकलन, ड्रोन आधारित निगरानी और पारंपरिक वन ज्ञान के समन्वय से USTR का लक्ष्य वन पुनर्स्थापन के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है।
यह पहल अतिक्रमण से वनों की रक्षा करने, क्षतिग्रस्त पेड़ों को पुनर्जीवित करने तथा महानदी के उद्दूम क्षेत्र की प्राकृतिक एवं पारिस्थितिक विरासत को भावी पीड़ियों के लिए सुरक्षित रखने के प्रति उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

