महासमुंद। CG Crime: बच्चों की सुरक्षा और भरोसे की जगह माने जाने वाले स्कूल में एक छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिले के एक सरकारी हाई स्कूल के प्रभारी प्राचार्य पर नौवीं कक्षा की छात्रा से अश्लील हरकत करने का आरोप है। छात्रा ने घर पहुंचकर मां को घटना बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। तुमगांव पुलिस ने शिकायत पर अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को आधे दिन की छुट्टी के बाद अधिकांश विद्यार्थी घर जा चुके थे। आरोप है कि इसी दौरान प्रभारी प्राचार्य ने छात्रा को अपने कक्ष में बुलाया और उसके साथ छेड़छाड़ की। घबराई छात्रा वहां से निकलकर घर पहुंची और रोते हुए मां को आपबीती सुनाई।

परिजनों का आरोप—घर पहुंचकर शिकायत रोकने की कोशिश
परिजनों का कहना है कि घटना के कुछ समय बाद शिक्षक उनके घर पहुंचा और मामले को दबाने का प्रयास किया। इस दौरान छात्रा की मां ने उसे थप्पड़ मारे। नाराज ग्रामीणों ने शिक्षक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
शिक्षक का ब्रेथ एनालाइजर से परीक्षण किए जाने की बात भी सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने उसके नशे में होने का दावा किया है, हालांकि इसकी पुष्टि पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट से होनी बाकी है।
आरोपी के खिलाफ वर्ष 2015-16 में दूसरे स्कूल में पदस्थापना के दौरान भी इसी तरह का प्रकरण दर्ज होने और निलंबन की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। पुराने मामले की स्थिति और बहाली से संबंधित विवरण की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। वर्तमान शिकायत में पुलिस छात्रा के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।
बच्चों की बात सुनें, शिकायत दबाने की कोशिश न करें
यह मामला बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार और स्कूल, दोनों की जिम्मेदारी याद दिलाता है। कोई बच्चा ऐसी घटना बताए तो उसे दोष देने, डराने या चुप कराने के बजाय उसकी बात गंभीरता से सुनना और सुरक्षित माहौल देना जरूरी है। बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा करते हुए शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
शिक्षक का पद बच्चों को शिक्षा, सम्मान और सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है। पद या प्रभाव के सहारे किसी बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार करना और शिकायत दबाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई ही जवाबदेही तय करती है।
बच्चों को डरकर चुप रहने की सीख नहीं, गलत व्यवहार के खिलाफ बोलने का भरोसा मिलना चाहिए। उनकी सुरक्षा से बड़ा कोई पद और किसी संस्था की प्रतिष्ठा नहीं है।


