हरिद्वार/रायपुर। GRAND NEWS: उत्तराखंड के दौरे पर गई संसद की प्राक्कलन समिति ने रविवार को हरिद्वार स्थित भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के प्रमुख औद्योगिक संयंत्र का दौरा किया। समिति के साथ रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद रहे। संयंत्र पहुंचने पर BHEL के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों का स्वागत किया और संस्थान में चल रही गतिविधियों से उन्हें अवगत कराया।
दौरे के दौरान सांसदों ने प्लांट में अलग-अलग उत्पादन क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान भारी विद्युत उपकरणों के निर्माण से लेकर अत्याधुनिक तकनीकी प्रक्रियाओं तक की जानकारी समिति को दी गई। BHEL के अधिकारियों ने संयंत्र की मौजूदा उत्पादन व्यवस्था, कामकाज, वित्तीय स्थिति और भविष्य में प्रस्तावित योजनाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस दौरान छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र और BHEL के बीच लंबे समय से चले आ रहे तकनीकी सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन होता है और प्रदेश के कई महत्वपूर्ण ताप विद्युत संयंत्रों में BHEL के बनाए उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीपत, कोरबा और राज्य के अन्य बिजली संयंत्रों में टर्बाइन और जनरेटर की भूमिका बिजली उत्पादन व्यवस्था में महत्वपूर्ण है।
अग्रवाल ने कहा कि हरिद्वार का BHEL संयंत्र देश की भारी इंजीनियरिंग क्षमता का एक प्रमुख केंद्र है। यहां बड़े आकार के टर्बाइन, टर्बो जनरेटर और औद्योगिक मोटरों सहित बिजली क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण उपकरण तैयार किए जाते हैं। संयंत्र के फाउंड्री और फोर्जिंग से जुड़े हिस्से में भारी औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक कास्टिंग और फोर्जिंग भी तैयार की जाती हैं।
दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र में BHEL की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की तकनीकी क्षमता का उपयोग महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे उपकरणों को इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जोड़कर देखा जा सकता है।
बृजमोहन अग्रवाल ने BHEL में अनुसंधान और नई तकनीक के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र की बदलती जरूरतों के साथ उत्पादन तकनीक को भी लगातार आधुनिक बनाना जरूरी है। साथ ही रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए स्वदेशी डिजाइन, अनुसंधान और निर्माण क्षमता को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी भूमिका निभाते हैं। ऐसे संस्थानों में तकनीकी उन्नयन और नवाचार को लगातार बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
इस अध्ययन दौरे के दौरान प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, समिति के अन्य सांसद, BHEL के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


