भानुप्रतापपुर। CG NEWS: भानुप्रतापपुर शासकीय महर्षि स्नातकोत्तर महाविद्यालय भानुप्रतापपुर में आयोजित एक कार्यक्रम ने शिक्षा परिसर में राजनीतिक गतिविधियों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के ‘अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित युवा संवाद के बाद अब इस आयोजन को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए हैं। एक तरफ आयोजक इसे युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने की पहल बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने शिक्षण संस्थान में इस तरह के आयोजन की आवश्यकता और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।


भाजयुमो की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, कार्यक्रम में भाजपा जिला महामंत्री राजा पांडेय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्र प्रथम की भावना और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रधान ने की। भाजयुमो मंडल प्रभारी हिमांशु ठाकुर और मंडल अध्यक्ष डिकेश साहू सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। आयोजकों ने इसे विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने वाला संवाद बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से जारी विज्ञप्ति में नगर पंचायत नेता प्रतिपक्ष विजय धामेचा ने आयोजन पर आपत्ति जताई है। उनका सवाल है कि महाविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में राजनीतिक विचारधारा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई? उन्होंने कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, रोजगार और भविष्य निर्माण का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने महाविद्यालय प्रबंधन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि ऐसे आयोजनों के लिए क्या नियम और अनुमति प्रक्रिया निर्धारित है।

इस घटनाक्रम में दो अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आए हैं, लेकिन इनके बीच एक महत्वपूर्ण संस्थागत सवाल भी खड़ा है। यदि उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूक करना है, तो ऐसे संवादों में सभी विचारों के लिए समान अवसर और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी? वहीं, यदि किसी आयोजन को लेकर नियमों या अनुमति प्रक्रिया पर सवाल हैं, तो महाविद्यालय प्रबंधन को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल भाजयुमो और कांग्रेस की विज्ञप्तियों के बाद बहस तेज है, लेकिन इस पूरे मामले में महाविद्यालय प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अंततः किसी भी शिक्षण संस्थान की सबसे बड़ी पहचान उसकी शिक्षा, निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए।


