बिलासपुर। शहर के सरकंडा थाना परिसर के सामने एक पुलिसकर्मी के कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की हालत देखकर उसके नशे में होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि यह मामला सरकंडा थाना के सामने का है। वीडियो में पुलिसकर्मी की स्थिति सामान्य नजर नहीं आ रही है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का कहना है कि जब कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाला कर्मचारी ही सार्वजनिक स्थान पर इस तरह नजर आएगा, तो आम जनता की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शराब नीति को लेकर भी उठ रहे सवाल
छत्तीसगढ़ में शराब से मिलने वाले राजस्व को लेकर सरकार की नीतियों पर समय-समय पर बहस होती रही है। इसी मुद्दे को लेकर वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर सरकार पर तंज कसते हुए लोग कह रहे हैं कि राजस्व और अर्थव्यवस्था बढ़ाने की कोशिशों के बीच कहीं प्रदेश में शराब का असर सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी न पड़ जाए।
बिलासपुर सरकंडा थाने के
सामने नशे में धुत सिपाही,
राजस्व और अर्थव्यवस्था
चमकाने की ऐसी होड़ की
पूरे प्रदेश को मयखाना बना
छोड़ा है,
जब खुद के कदम नहीं संभल
रहे तो आम जनता की सुरक्षा
का क्या कहना,
हालत देखकर यह कहना
अतिश्योक्ति नहीं होगा कि
शराब को राजकीय पेय घोषित
कर दिया जाएगा। pic.twitter.com/1ch6IkzyoY
— CG_04 (@CG_wasi) September 10, 2026
हालांकि, किसी एक वीडियो के आधार पर पूरे पुलिस विभाग या शराब नीति पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में पुलिसकर्मी है और वह ड्यूटी या थाने के आसपास नशे की हालत में पाया गया, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर अनुशासनात्मक मामला बन सकता है।
जांच और कार्रवाई का इंतजार
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित पुलिसकर्मी का मेडिकल परीक्षण कराया गया और क्या उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी? पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक बयान या जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल वायरल वीडियो ने बिलासपुर पुलिस और सरकंडा थाना की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी है। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

