सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में धान खरीदी से जुड़ी कथित अनियमितता के मामले में एक समिति प्रबंधक की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है। आरोप है कि धान खरीदी में करीब 1.31 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हुई और खरीदे गए धान में मिट्टी मिलाकर मात्रा एवं गुणवत्ता से संबंधित अनियमितता की गई। मामले में कार्रवाई के बाद सहकारी समिति से जुड़े प्रबंधन और धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला सक्ती जिले की पुटीडीह सेवा सहकारी समिति से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, समिति में धान खरीदी और उसके रख-रखाव से संबंधित गड़बड़ियों की जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई। इसके बाद समिति के पूर्व प्रबंधक शशिकांत महंत के खिलाफ कार्रवाई की गई।
धान में मिट्टी मिलाने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप धान में मिट्टी मिलाने से जुड़ा है। आरोप है कि धान की मात्रा बढ़ाने और खरीदी के रिकॉर्ड में हेरफेर करने के उद्देश्य से धान में मिट्टी मिलाई गई। इससे सरकारी धान खरीदी व्यवस्था को आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।
हालांकि, मिट्टी मिलाने और 1.31 करोड़ रुपये की गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
धान खरीदी में करोड़ों की अनियमितता का आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 1.31 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का मामला सामने आया। इसके बाद संबंधित समिति प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की गई और समिति प्रबंधक को गिरफ्तार किया गया।
धान खरीदी में इतनी बड़ी राशि की गड़बड़ी सामने आने के बाद सहकारिता विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर धान खरीदी केंद्रों पर खरीदी, स्टॉक, गुणवत्ता, परिवहन और भंडारण की प्रक्रिया की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पहले भी सामने आई थीं धान खरीदी में अनियमितताओं की शिकायतें
सक्ती जिले में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर इससे पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में सहकारिता विभाग के नोडल अधिकारी पर धान खरीदी 2025-26 के दौरान अनियमितता और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए जाने की जानकारी सामने आई थी। शिकायतकर्ता ने धान खरीदी केंद्रों में नियुक्तियों और कथित लेन-देन की जांच की मांग की थी। संबंधित अधिकारी का पक्ष उस रिपोर्ट में सामने नहीं आया था।
गिरफ्तारी के बाद जांच पर टिकी नजर
समिति प्रबंधक की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां कथित गड़बड़ी की पूरी कड़ी खंगाल रही हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि धान खरीदी में कितनी मात्रा में अनियमितता हुई, सरकारी रिकॉर्ड में कितना अंतर था और कथित आर्थिक नुकसान के लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
फिलहाल, 1.31 करोड़ रुपये की गड़बड़ी और धान में मिट्टी मिलाने के आरोप मामले की जांच का हिस्सा हैं। जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

