गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, जंगल में घेराबंदी कर पकड़े गए दोनों आरोपी
गिरीश गुप्ता गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर क्षेत्र के फरसरा बीट में वन विभाग की टीम ने जंगल में शिकार करने पहुंचे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से तीन मृत जंगली मुर्गे और करीब 53 फीट लंबा तार से बना फंदा बरामद किया गया है।
वन विभाग के अनुसार, दोनों आरोपी जंगल में फंदा लगाकर जंगली मुर्गों का शिकार कर रहे थे। कार्रवाई के बाद दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जिला जेल गरियाबंद भेज दिया गया है।
गोपनीय सूचना के बाद जंगल में बिछाया गया जाल
वन विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर क्षेत्र में अवैध शिकार के इरादे से जंगल में प्रवेश करने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए इसकी जानकारी उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक तथा सहायक संचालक उदंती (मैनपुर) को दी गई।
अधिकारियों के निर्देश पर इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर के वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की टीम गठित की गई। टीम ने ग्राम डुमाघाट के आसपास लगे वनक्षेत्र में सघन गश्त और घेराबंदी शुरू की।

संदिग्ध हालत में घूम रहे थे दो लोग
वन विभाग की टीम जब कक्ष क्रमांक 1213 में गश्त कर रही थी, उसी दौरान जंगल के अंदर दो संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिए। टीम ने दोनों को घेराबंदी कर पकड़ लिया और पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में दोनों ने अपना नाम हलधर पिता छोटा गोंड़, निवासी ग्राम डुमाघाट और दिलेर पिता जलधर गोंड़, निवासी ग्राम डुमाघाट बताया।
वन विभाग की टीम ने जब दोनों की तलाशी ली तो उनके पास मौजूद सफेद प्लास्टिक के बोरे से बने थैले की जांच की गई। थैले के अंदर तीन नग जंगली मुर्गे मृत अवस्था में मिले।
इसके अलावा आरोपियों के पास से तार से तैयार किया गया करीब 53 फीट लंबा फंदा भी बरामद किया गया। वन विभाग के अनुसार इसी तरह के फंदे का इस्तेमाल जंगल में जंगली मुर्गों को पकड़ने के लिए किया जा रहा था।
पूछताछ में कबूला शिकार का अपराध
वन विभाग की पूछताछ में आरोपियों ने जंगल में फंदा लगाकर जंगली मुर्गा यानी स्थानीय रूप से झार कुकरी का शिकार करने की बात स्वीकार की। इसके बाद दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर वन परिक्षेत्र कार्यालय इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर लाया गया।
वन विभाग ने बरामद तीनों जंगली मुर्गों और शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले फंदे को जब्त कर लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने के बाद वन विभाग ने पी.ओ.आर. प्रकरण क्रमांक 17/424, दिनांक 03 सितंबर 2026 दर्ज किया। दोनों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।
इसके बाद दोनों आरोपियों को प्रथम श्रेणी न्यायालय देवभोग के समक्ष पेश किया गया।
14 दिन की न्यायिक रिमांड, जिला जेल भेजे गए आरोपी
मामले में न्यायालय के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को 14 दिन की रिमांड पर जिला जेल गरियाबंद भेज दिया गया है। यानी जंगली मुर्गों के शिकार के आरोप में पकड़े गए दोनों आरोपियों को अब जेल में रहना होगा।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध शिकार, अवैध कटाई और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी कर रहा है।
इन वनकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में वन परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर सुशील कुमार सागर, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी राकेश सिंह परिहार, विवेचना अधिकारी भूपेन्द्र कुमार सोनी, वनरक्षक रोहित कमरो, रुस्तम यादव, पुनीत राम ध्रुव, देवीसिंग यादव, तुलाराम नेताम और गिरधारी बिसी सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वन विभाग की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाने के लिए निगरानी और कार्रवाई को लगातार तेज किया जा रहा है। जंगल में अवैध तरीके से फंदे लगाकर वन्यजीवों का शिकार करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कार्रवाई जारी रखने की बात विभाग ने कही है।

