रायपुर: छत्तीसगढ़ में सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने के तमाम दावों के बावजूद आज भी राज्य के 1,200 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है। इनमें से लगभग 400 गांव हर साल बारिश के मौसम में पूरी तरह टापू बन जाते हैं, जिससे उनका जिला और ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को 31 अगस्त तक विस्तृत कार्ययोजना (एक्शन प्लान) तैयार कर सौंपने के निर्देश दिए हैं।
बारिश में कट जाता है संपर्क
जानकारी के अनुसार, जिन गांवों तक अभी तक पक्की सड़क नहीं पहुंची है, वहां चार पहिया वाहन तो दूर, सामान्य दिनों में भी दोपहिया वाहन से पहुंचना मुश्किल होता है। बारिश के दौरान नदी-नालों में पानी बढ़ने से इन गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोग कई दिनों तक बाहर नहीं निकल पाते।
एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती
सड़क और पुल-पुलियों के अभाव का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। कई गांवों तक 108 एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच पाती, जिससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इसके अलावा शिक्षा, राशन वितरण और अन्य सरकारी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
नवा रायपुर में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों से कहा कि सभी ऐसे गांवों का सर्वे कर ऑल वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की योजना तैयार की जाए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी सचिव को निर्देश दिए कि 31 अगस्त तक नए प्रस्ताव और प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार कर शासन को भेजे जाएं, ताकि बारिश समाप्त होते ही सितंबर-अक्टूबर से निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो ठेकेदार तय समय और गुणवत्ता के अनुसार काम नहीं करेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उनके अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को भी नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ना प्राथमिकता है, ताकि लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

