रायपुर। बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ में मौसम को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 27 और 28 अक्टूबर को प्रदेश के 12 जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की आशंका है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को अलर्ट रहने और आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से प्रदेश के कुल 1769 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। वहीं, आपदा की स्थिति में लोगों को तत्काल मदद उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। जरूरत पड़ने पर नागरिक टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
इन 12 जिलों में विशेष सतर्कता
मौसम विभाग से मिली जानकारी के आधार पर जिन जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका जताई गई है, उनमें सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बालोद और रायपुर शामिल हैं।
इन जिलों में प्रशासन को संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी और तेज हवाओं से नुकसान की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है।
1769 गांवों पर प्रशासन की नजर
संभावित आपदा के खतरे को देखते हुए प्रदेश में संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इनमें 12 अति संवेदनशील जिलों के 763 गांव शामिल हैं। इसके अलावा राज्य के शेष 21 जिलों में 1006 संवेदनशील गांव चिन्हित किए गए हैं।
इस तरह प्रदेशभर में कुल 1769 गांवों को आपदा प्रबंधन की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। इन क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष निगरानी और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
जर्जर मकानों की पहचान और जलाशयों की निगरानी के निर्देश
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखी जाए। उन्होंने विशेष रूप से उन जर्जर और असुरक्षित मकानों की पहचान करने को कहा है, जिन्हें तेज हवाओं के दौरान नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इसके साथ ही जलाशयों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी जलाशय से पानी छोड़ने की स्थिति बनती है, तो संबंधित क्षेत्रों के लोगों को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि समय रहते आवश्यक सावधानी बरती जा सके।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने पर जोर दिया गया है।
मौसम की जानकारी के लिए इन ऐप का करें इस्तेमाल
मौसम संबंधी चेतावनियों और संभावित खतरों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए दामिनी और मेघदूत मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ऐप के माध्यम से मौसम से जुड़ी जानकारियां और चेतावनियां प्राप्त की जा सकती हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। तेज हवाओं के दौरान कमजोर पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर इमारतों के आसपास खड़े होने से भी परहेज करना चाहिए।
आपात स्थिति में 1070 नंबर पर करें संपर्क
प्रदेश में आपदा संबंधी सूचना देने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा गया है। किसी भी आपदा या आपात स्थिति में नागरिक टोल फ्री नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा है कि संभावित आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर सूचना, प्रशासनिक सतर्कता और नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी है।
फिलहाल प्रशासन का जोर संवेदनशील इलाकों में तैयारियां पूरी रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने पर है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए अगले दो दिन प्रदेश के संबंधित जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

