रायपुर। CG NEWS: मिट्टी को आकार देकर आजीविका चलाने वाले शिल्पकारों का काम आसान बनाने के लिए छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड ने आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। कुम्भकार टेराकोटा योजना के तहत प्रदेश के छह जिलों के 181 माटीशिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक दिए गए। इन उपकरणों से उत्पादन में लगने वाला समय और श्रम कम करने तथा शिल्पकारों की कार्यक्षमता बढ़ाने का उद्देश्य रखा गया है।
बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त शंभूनाथ चक्रवर्ती ने 18 अक्टूबर को रायपुर और 22 अक्टूबर को महासमुंद में आयोजित कार्यक्रमों में पात्र हितग्राहियों को विद्युत चाक प्रदान किए।

रायपुर में 92 और महासमुंद के कार्यक्रम में 89 हितग्राहियों को लाभ
रायपुर में हुए वितरण कार्यक्रम में चार जिलों के 92 माटीशिल्पी लाभान्वित हुए। इनमें रायपुर के 52, बेमेतरा के 36, कबीरधाम के तीन और दुर्ग का एक हितग्राही शामिल है।
महासमुंद में आयोजित दूसरे कार्यक्रम में 89 शिल्पकारों को विद्युत चाक दिए गए। इनमें महासमुंद जिले के 71 और बलौदाबाजार जिले के 18 हितग्राही शामिल रहे।
उत्पादन बढ़ाने के साथ स्वरोजगार को प्रोत्साहन
बोर्ड अध्यक्ष चक्रवर्ती ने कहा कि शिल्पकारों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना राज्य शासन का उद्देश्य है। विद्युत चाक की मदद से वे कम समय में अधिक उत्पादन कर सकेंगे। इससे उन्हें अपना काम बढ़ाने और आय के अवसर बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि एक विद्युत चाक के जरिए परिवार के औसतन तीन व्यक्तियों को स्वरोजगार से जोड़ने की संभावना रहती है। इसी आधार पर वितरित किए गए 181 चाकों से करीब 543 लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलने का अनुमान है।
पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने पर जोर
चक्रवर्ती ने माटीकला को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों को उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने से उनके हुनर को प्रोत्साहन मिलेगा तथा इस पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रमों में बोर्ड के प्रबंध संचालक जय प्रकाश मौर्य, प्रबंधक साकेत कुमार राजपुरिया, बोर्ड के कर्मचारी और कुम्हार समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


