धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भटगांव में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर रविवार को उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब एक महिला की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मृतका का परिवार करीब चार साल पहले ईसाई धर्म अपना चुका था। इसी वजह से समाजजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। काफी देर तक चली बैठक और समझाइश के बाद परिवार के सदस्य की हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया पूरी कराई गई, जिसके बाद महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया।
शनिवार रात महिला की हुई मौत
मिली जानकारी के अनुसार, धमतरी जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर सोरम रोड स्थित ग्राम पंचायत भटगांव के मजराटोला में 28 वर्षीय सरस्वती ध्रुव, पत्नी सुरेश ध्रुव की शनिवार रात मौत हो गई थी। रविवार सुबह परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान समाज के कुछ लोगों ने परिवार के कथित धर्मांतरण का मुद्दा उठाते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया।
इसके बाद गांव में बैठक बुलाई गई। बताया गया कि अंतिम संस्कार को लेकर करीब एक घंटे तक चर्चा और विवाद की स्थिति बनी रही। मामला बढ़ने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
परिवार के धर्म परिवर्तन को लेकर जताई गई आपत्ति
समाज के लोगों का कहना था कि सुरेश ध्रुव का परिवार पिछले करीब चार वर्षों से ईसाई धर्म से जुड़ा हुआ था। इसी वजह से समाज की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर आपत्ति जताई गई।
मामले में परिवार के सदस्य सुरेश ध्रुव से समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों को दोबारा स्वीकार करने की बात कही गई। इसके बाद सुरेश ने हिंदू धर्म और समाज की परंपराओं के अनुसार रहने की सहमति दी।
तिलक लगाकर पिलाया गया गंगाजल
इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों की उपस्थिति में सुरेश ध्रुव को तिलक लगाया गया और गंगाजल पिलाया गया। धार्मिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनकी ‘घर वापसी’ कराए जाने की बात सामने आई।
इस प्रक्रिया के बाद समाज के लोगों ने मृतका सरस्वती ध्रुव के अंतिम संस्कार में शामिल होने की सहमति दी। महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और समाज की परंपरा के अनुसार किया गया।
कई घंटे तक गांव में बनी रही चर्चा की स्थिति
अंतिम संस्कार को लेकर हुए इस घटनाक्रम के बाद भटगांव में काफी देर तक चर्चा का माहौल रहा। धर्मांतरण और अंतिम संस्कार को लेकर विवाद ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को सामने ला दिया है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, विवाद के बाद स्थिति को बातचीत के जरिए शांत किया गया और अंततः अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार भी परिवार की सहमति से धार्मिक रीति-रिवाज स्वीकार किए जाने के बाद अंतिम संस्कार की अनुमति दी गई।
धमतरी में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद
धमतरी में धर्मांतरण को लेकर इससे पहले भी अंतिम संस्कार और शव दफनाने को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। अगस्त 2026 में श्यामतराई में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों ने श्मशान जाने का रास्ता रोक दिया था। उस मामले में प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव को धमतरी शहर के दानीटोला स्थित शांति घाट ले जाकर अंतिम संस्कार कराया गया था।
जनवरी 2026 में भी नवागांव में एक बुजुर्ग महिला के शव को गांव में दफनाने को लेकर विवाद हुआ था। बाद में पुलिस की मौजूदगी में धमतरी शहर के क्रिश्चियन कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार कराया गया था।
धर्मांतरण को लेकर राज्य में भी बहस
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रहा है। राज्य में धर्मांतरण से संबंधित नए कानूनी प्रावधानों को लेकर भी बहस चलती रही है। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन को लेकर आरोप और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। इसलिए किसी भी धर्मांतरण के आरोप की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक या पुलिस जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।
भटगांव के इस मामले में उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, परिवार के सदस्य ने हिंदू धर्म और समाज की परंपराओं को स्वीकार करने की सहमति दी, जिसके बाद महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया।
नोट: धर्मांतरण से जुड़े मामलों में अलग-अलग पक्षों के दावे हो सकते हैं। इस खबर में उपलब्ध स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारी को आधार बनाया गया है। किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक जांच या प्रशासनिक पुष्टि के आधार पर ही माना जाना चाहिए।

