रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले में सोमवार, 5 अक्टूबर को बड़ा कानूनी घटनाक्रम होने जा रहा है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) इस मामले में विशेष न्यायालय के सामने अंतिम आरोपपत्र यानी फाइनल चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल, IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत 9 आरोपियों को विशेष अदालत ने समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया है।
करीब दो साल से चल रही जांच
कोल लेवी प्रकरण की जांच EOW करीब दो वर्षों से कर रही है। एजेंसी अब तक इस मामले में चार आरोपपत्र अदालत में पेश कर चुकी है। अब जांच के अंतिम चरण में उन आरोपियों के खिलाफ भी अभियोग पत्र पेश किया जा रहा है, जिनके संबंध में जांच के दौरान दस्तावेज, कथित वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्य जुटाए जाने का दावा किया गया है।
इस मामले में ED की जांच और पूर्व में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर राज्य की EOW ने भी कार्रवाई आगे बढ़ाई है। अलग-अलग रिपोर्टों में मामले में करीब 35 से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात सामने आई है, जबकि 5 अक्टूबर की सुनवाई के लिए 9 आरोपियों को विशेष रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे सामने आया कथित कोल लेवी का नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और उससे जुड़ी व्यवस्था में कथित तौर पर किए गए बदलाव से जुड़ा है।
आरोप है कि 15 जुलाई 2020 को खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक समीर विश्नोई के आदेश के बाद ऑनलाइन कोयला परिवहन परमिट की व्यवस्था को ऑफलाइन कर दिया गया। इसके बाद कोयला वाशरी संचालकों और परिवहन से जुड़े लोगों से कथित रूप से अवैध लेवी वसूली का नेटवर्क तैयार हुआ।
जांच रिपोर्टों में बताया गया है कि वाशरी संचालकों से 100 रुपये प्रति टन और वाशरी से कोयला निकलने पर अतिरिक्त 25 रुपये प्रति टन की कथित वसूली की जाती थी। कोरबा और रायगढ़ में इस नेटवर्क के संचालन के लिए अलग-अलग कार्यालय बनाए जाने और वहां से रकम इकट्ठा किए जाने का भी आरोप जांच एजेंसियों की ओर से लगाया गया है।
सूर्यकांत तिवारी के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार कथित वसूली की रकम को कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया जाता था। रिपोर्टों में निखिल चंद्राकर समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।
आरोप है कि कोयला कारोबारियों और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम एकत्र करने के बाद इसे नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था। एजेंसियों ने इस कथित नेटवर्क से जुड़े लेन-देन, डायरी, डिजिटल चैट और अन्य दस्तावेजों की जांच की है।
नेताओं और अधिकारियों तक पहुंची रकम का दावा
जांच से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्टों में कई नेताओं एवं अधिकारियों तक कथित रूप से रकम पहुंचने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया को कथित तौर पर 169 बार में करीब 31 करोड़ रुपये मिलने और इसके जरिए उनकी मां के नाम पर 22 संपत्तियां खरीदे जाने का आरोप है।
इसी तरह निलंबित IAS रानू साहू को कथित तौर पर करीब 5.52 करोड़ रुपये मिलने और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदे जाने का उल्लेख जांच में किया गया है।
देवेंद्र यादव पर क्या आरोप?
मामले में भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि उन्हें कथित तौर पर 11 किश्तों में करीब 3 करोड़ रुपये मिले और इस रकम का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किया गया।
रिपोर्टों में खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े खर्च का भी उल्लेख है। इसके अलावा देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच कथित WhatsApp बातचीत का भी जांच में जिक्र होने की बात सामने आई है।
हालांकि, किसी जांच एजेंसी की ओर से आरोपी बनाया जाना या किसी दस्तावेज में नाम सामने आना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।
चंद्रदेव राय पर भी गंभीर आरोप
पूर्व विधायक चंद्रदेव राय का नाम भी मामले में सामने आया है। जांच एजेंसी से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर 46 लाख रुपये मिले थे।
इनमें से करीब 42 लाख रुपये चुनावी गतिविधियों में खर्च किए जाने और शेष रकम से रायपुर के एक आभूषण प्रतिष्ठान से उनकी पत्नी के लिए करीब 60 ग्राम सोने का हार खरीदे जाने का आरोप है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हार की खरीद से पहले मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से संपर्क किया गया था।
चुनाव और मीडिया प्रबंधन में पैसे के इस्तेमाल का दावा
जांच से संबंधित रिपोर्टों में कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं तक कथित रकम पहुंचने का भी उल्लेख है।
कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह के संबंध में रिपोर्टों में करीब 2.01 करोड़ रुपये प्राप्त करने और इसे पार्टी के लिए वाहन तथा मीडिया प्रबंधन में खर्च किए जाने की बात सामने आई है।
वहीं कांग्रेस नेता विनोद तिवारी के संबंध में करीब 1.87 करोड़ रुपये की कथित राशि का उल्लेख किया गया है। एजेंसी की जांच में इन रकम के संपत्ति खरीद और चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल की बात कही गई है।
अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
कोल लेवी मामले की जांच केवल राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
मामले में IAS अधिकारी समीर विश्नोई, रानू साहू और सौम्या चौरसिया, खनिज विभाग के अधिकारी एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है।
चार्जशीट से जुड़े दावों में कुछ IPS अधिकारियों के कथित संपर्क और विभागीय जानकारी लीक किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम सत्यापन और न्यायिक निर्धारण अदालत की प्रक्रिया का हिस्सा है।
170 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्ती का दावा
मामले से जुड़ी ताजा रिपोर्टों में जांच एजेंसियों के हवाले से करीब 170 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति जब्त किए जाने की बात सामने आई है। वहीं अधिकारियों के अनुसार कथित लेवी की रकम में से नेताओं और अधिकारियों तक करोड़ों रुपये पहुंचने की जांच की गई है।
देवेंद्र यादव से भी हो चुकी है पूछताछ
फाइनल चार्जशीट से पहले EOW ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव से भी पूछताछ की थी। रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर के अंतिम सप्ताह में EOW कार्यालय में उनसे करीब दो घंटे से अधिक समय तक सवाल-जवाब किए गए थे।
जांच एजेंसी की पूछताछ कथित वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और सूर्यकांत तिवारी से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
किन धाराओं में मामला दर्ज है?
देवेंद्र यादव को भेजे गए EOW/ACB के नोटिस से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A और 12 के साथ IPC की धारा 420, 120-B, 384, 467, 468 और 471 का उल्लेख किया गया है। यह जानकारी जांच एजेंसी के नोटिस के हवाले से प्रकाशित हुई है।
आज क्या होगा?
5 अक्टूबर 2026 को रायपुर की विशेष अदालत में इस मामले की अहम सुनवाई है। EOW/ACB की ओर से अंतिम अभियोग पत्र पेश किए जाने की प्रक्रिया है और समन पाने वाले 9 आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होना है।
फाइनल चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी ने किन आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन से आरोप और साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं। इसके बाद अदालत चार्जशीट और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगी तथा मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सबसे जरूरी बात
यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। ऊपर बताए गए वित्तीय लेन-देन, अवैध वसूली, चुनावी खर्च, संपत्ति खरीद और अन्य आरोप जांच एजेंसियों/चार्जशीट से जुड़े दावों पर आधारित हैं। किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप अदालत में अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही होगा।

