लातूर। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लातूर जिले में फसल नुकसान का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने एक किसान अपनी हालत बताते-बताते भावुक हो गया और फूट-फूटकर रोने लगा। किसान ने मुख्यमंत्री से फसल नुकसान के बदले आर्थिक मदद की गुहार लगाई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है।
मुख्यमंत्री फडणवीस बुधवार को लातूर जिले के निलंगा तहसील के जाऊ और खरोसा गांव पहुंचे थे। उन्होंने प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया और किसानों से सीधे बातचीत कर फसल और पानी की स्थिति की जानकारी ली। इसी दौरान एक किसान मुख्यमंत्री के पास पहुंचा और अपनी बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल का दर्द बताते हुए रो पड़ा। फडणवीस ने किसान को संभाला और गले लगाकर उसे मदद का भरोसा दिया।
सोयाबीन की खेती में हजारों रुपये खर्च, बारिश ने बिगाड़ा पूरा गणित
किसान ने बताया कि सोयाबीन की खेती में प्रति एकड़ करीब 25 हजार रुपये तक खर्च आया है। लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण फसल सूख गई। किसान ने सरकार से प्रभावित किसानों को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की।
लातूर और आसपास के मराठवाड़ा क्षेत्र में इस साल बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी दौरे के दौरान बताया कि लातूर और धाराशिव में सामान्य बारिश की तुलना में करीब 50 प्रतिशत बारिश हुई है। इसका सीधा असर सोयाबीन समेत दूसरी फसलों पर पड़ा है।
CM ने दिया मदद का भरोसा
किसान की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और सूखे से प्रभावित किसानों को राहत दी जाएगी। फडणवीस ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ पीने के पानी और पशुओं के चारे की व्यवस्था करना भी है। रबी की फसल के लिए किसानों को संभव मदद देने की बात भी उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार सूखे जैसी स्थिति को लेकर जल्द सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी करने की तैयारी में है। फसल नुकसान का पंचनामा शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाई जाएगी।
पानी और चारे की भी बढ़ रही चिंता
फसल नुकसान के साथ मराठवाड़ा के कई इलाकों में पानी और पशुओं के चारे को लेकर भी चिंता बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले महीनों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी। जरूरत पड़ने पर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने और अन्य राहत उपायों पर भी काम किया जाएगा।
लातूर के दौरे के दौरान किसानों ने अपनी फसल, पानी और आर्थिक नुकसान से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। किसान के भावुक होने की घटना ने सूखे जैसी स्थिति के बीच खेती पर पड़ रहे असर को सामने ला दिया है। सरकार की ओर से राहत के ऐलान और फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया पर अब किसानों की नजर है।

