पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ा था और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से उन पर पद छोड़ने का कोई दबाव नहीं बनाया गया था। सम्राट चौधरी ने यह बात 18 सितंबर को पटना में आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम में कही।
सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की थी। उनके मुताबिक, यह कहना गलत है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने खुद पद छोड़ने का फैसला किया और इसके पीछे उन्होंने पुराने राजनीतिक संबंधों और सहयोग का भी उल्लेख किया था।
‘नीतीश ने खुद पद छोड़ा, BJP ने नहीं कहा था’
सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि नीतीश कुमार ने अटल बिहारी वाजपेयी के समय का उदाहरण दिया था।
सम्राट चौधरी के अनुसार, नीतीश कुमार का कहना था कि जब बीजेपी के पास उनकी पार्टी से ज्यादा विधायक थे, तब भी अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया था। अब वह उसी राजनीतिक सद्भाव का जवाब देना चाहते थे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार की सत्ता में बदलाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हट चुके हैं और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। सम्राट चौधरी बिहार के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री हैं।
नीतीश अभी भी NDA के नेता: सम्राट
सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की मौजूदा राजनीतिक भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भले ही अब राज्यसभा के सदस्य हैं, लेकिन बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के निर्विवाद नेता बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक अनुभव सरकार के लिए उपयोगी है और वह सरकार के कामकाज को लेकर मार्गदर्शन देते हैं। इससे पहले ‘पंचायत आजतक बिहार 2026’ में भी सम्राट चौधरी ने कहा था कि अगर नीतीश कुमार कोई सलाह देंगे तो वह उसे जरूर सुनेंगे।
2000 की राजनीति का भी किया जिक्र
सम्राट चौधरी ने अपने बयान में वर्ष 2000 की बिहार की राजनीति का भी उल्लेख किया। उस समय विधानसभा चुनाव के बाद किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। नीतीश कुमार, जो उस समय समता पार्टी में थे, मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाने के कारण करीब एक सप्ताह बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
सम्राट चौधरी ने इसी संदर्भ में कहा कि बीजेपी ने अलग-अलग समय पर नीतीश कुमार का समर्थन किया है और अब नीतीश कुमार ने भी उसी तरह राजनीतिक सद्भाव दिखाया है।
तेजस्वी यादव के बयान पर भी पलटवार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने सम्राट चौधरी को ‘चुना हुआ नहीं, चुना गया नेता’ बताया था।
सम्राट चौधरी ने इसका जवाब देते हुए लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। उनके मुताबिक, राबड़ी देवी जब पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं, तब वह जनता द्वारा निर्वाचित विधायक नहीं थीं।
लालू प्रसाद के मुख्यमंत्री बनने का भी जिक्र
सम्राट चौधरी ने अपने बयान में 1990 के बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय जनता दल की सरकार को बीजेपी का बाहरी समर्थन प्राप्त था और लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री बने थे।
उन्होंने दावा किया कि उस समय दलित नेता रामसुंदर दास भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, 1990 में जनता दल के विधायक दल के नेता के चुनाव में लालू प्रसाद यादव ने रामसुंदर दास को मामूली अंतर से हराया था।
सरकार की प्राथमिकताओं पर भी बोले सम्राट
सम्राट चौधरी ने अपने बयान में सरकार की प्राथमिकताओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का फोकस कानून-व्यवस्था, शिक्षा और औद्योगिकीकरण के जरिए राजस्व बढ़ाने पर रहेगा। उन्होंने बिहार में बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया और कहा कि राज्य सरकार केंद्र की सहायता से राहत एवं बचाव कार्य कर रही है।
उन्होंने बाढ़ की समस्या के दीर्घकालीन समाधान के लिए नदियों को आपस में जोड़ने जैसे उपायों पर काम करने की बात भी कही।
राजनीतिक बदलाव के बीच आया बयान
बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चा रही है। सम्राट चौधरी का ताजा बयान इसी बहस के बीच आया है। हालांकि, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के पीछे बीजेपी का दबाव था या नहीं—इस संबंध में सम्राट चौधरी ने स्पष्ट रूप से इसे खारिज किया है। यह उनके द्वारा दिया गया राजनीतिक स्पष्टीकरण है।

